सुबह बेटी की और शाम को उठी मां की अर्थी
बुधवारसुबह 8 बजे मासूम बेटी और दोपहर को मां की लाश लेकर एंबुलेंस पहुंची तो कठौती गांव में हर व्यक्ति दिल दहल गया। दो एंबुलेंस देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। गांव में हर कोई यह जानने को बेताब था कि आखिर ऐसा क्या था कि सीमा अपनी मासूम बेटी के साथ जल गई। घटना की साक्षी रही दोनों मां बेटी की इलाज के दौरान मौत हो गई। उनके बयान तक नहीं हो पाए।
कठौती में घर में झुलसी रामेश्वर साद की प|ी सीमा उसकी मासूम बेटी की इलाज के दौरान मौत हो गई। सुबह 8 बजे कठौती में मासूम मोनिका की लाश पहुंची। काफी देर तक एंबुलेंस को सड़क किनारे ही खड़ा रखा गया। उसकी मां की लाश के पहुंचने का इंतजार किया गया। लेकिन जोधपुर में पोस्टमार्टम में देर होने की संभावना के चलते मासूम का अंतिम संस्कार कर दिया गया। दोपहर तीन बजे सीमा का शव कठौती पहुंचा और शाम से पहले पहले ही उसकी भी अर्थी उठी। परिजनों के रो-रो कर हाल-बेहाल थे। इस दौरान गांव में दुकानें बंद रहीं।
यह हुआ था मंगलवार को
रामेश्वरउसके परिजन मंगलवार को खेत गए हुए थे। पीछे से पड़ोसियों ने उनके घर से धुआं उठता देखा तो रामेश्वर को सूचना दी। वह पहुंचा और मकान का दरवाजा खोला तो सीमा उसकी 8 साल की बेटी मोनिका बुरी तरह जले हुए तड़प रहे थे। दोनों को पहले नागौर के राजकीय अस्पताल लाया गया। शाम को जोधपुर रेफर कर दिया गया। मंगलवार रात आठ बजे मोनिका की मौत हो गई थी। उसके बाद सीमा ने भी दम तोड़ दिया। अभी तक आग लगने का कारणों का पता नहीं चल सका।
पुलिसने लिए बयान, जांच शुरू
जायलथानाधिकारी भारत सिंह ने बताया कि घटना के दौरान परिजनों आस-पास के लोगों के बयान लिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला कि दो बहनें एक ही परिवार में ब्याही थी। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली सीमा के सास-ससुर की पहले ही मौत हो गई थी। देवरानी अन्य प्रदेश में गई हुई थी। पड़ोसी फिलहाल गैस स्टोव के भभकने को आग का कारण मान रहे हैं।
यह हुआ था मंगलवार को
रामेश्वरउसके परिजन मंगलवार को खेत गए हुए थे। पीछे से पड़ोसियों ने उनके घर से धुआं उठता देखा तो रामेश्वर को सूचना दी। वह पहुंचा और मकान का दरवाजा खोला तो सीमा उसकी 8 साल की बेटी मोनिका बुरी तरह जले हुए तड़प रहे थे। दोनों को पहले नागौर के राजकीय अस्पताल लाया गया। शाम को जोधपुर रेफर कर दिया गया। मंगलवार रात आठ बजे मोनिका की