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105 मकानों के निर्माण में 13.81 लाख की गड़बड़ी तो 1617 मकानों में क्या हुआ होगा?

7 वर्ष पहले
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बालवारोड पर हाउसिंग बोर्ड की आवासीय योजना पर करप्शन के बादल छा गए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई से यह खुलासा हो चुका है कि 105 मकानों में सीमेंट गारे में निर्धारित मापदंडों को दरकिनार कर खूब मिट्टी बजरी मिलाई गई।

इसमें ठेकेदारों अभियंताओं की मिलीभगत से सरकार को 13 लाख 81 हजार रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। मकान ही कमजोर बना दिए गए जिनका अभी आवंटन ही होना है। इस योजना में अब तक 1722 मकान बन चुके हैं।

ऐसे में सवाल यह खड़ा हो गया है कि 105 मकानों के साथ ही बाकी के 1617 मकानों में भी क्या इसी तरह से मिलावट कर नियमों को धत्ता बताया गया। रोचक बात तो यह है कि इतना सब कुछ होने के बावजूद हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों का कहना है उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं है। नागौर एसीबी द्वारा हाउसिंग बोर्ड योजना में मकान निर्माण में गड़बड़ी का जो खुलासा किया गया है उससे पूरे प्रदेश में हाउसिंग बोर्ड के जरिए बनने वाले मकानों की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकृत सूत्रों ने बताया कि नागौर में दो हजार मकानों की बड़ी आवासीय योजना में बड़े स्तर पर मकान निर्माण नियमों की अनदेखी की गई है। सूत्रों के अनुसार अब तक 1722 मकान इस योजना में बन चुके हैं। इनमें आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग, अल्प आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग उच्च आय वर्ग के मकान बनाए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड की इस परियोजना में एसीबी ने अभी तक सिर्फ दो कंस्ट्रक्शन कंपनियों के काम की जांच की है जबकि इस परियोजना में करीब एक दर्जन फर्म कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने मकान निर्माण किए हैं। ऐसे में उनके काम की जांच को जरूरी बताया जा रहा है।

इनको माना है आरोपी

एसीबी ने यह किया खुलासा

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