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भाई के लिए बहन जान दांव पर लगाने को तैयार, पैसे की कमी से अटका इलाज

7 वर्ष पहले
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कुचामनशहर के गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले 26 वर्षीय कमल भार्गव का पीलिया की वजह से लीवर खराब हो गया है। लीवर के टिश्यू बदलने के लिए छोटी बहन ने अपने लीवर का कुछ हिस्सा काटकर भाई को दान करने की सहमति दे दी है। डाक्टर ट्रांसप्लांट की इस प्रक्रिया में 12 लाख रुपए का खर्च बता रहे हैं। डेढ़ लाख की मदद मिल चुकी है मगर अभी भी इस गरीब परिवार को 10.50 लाख रुपए की दरकार है। पूरा परिवार सदमे में हैं और दानवीर लोगों की तरफ आस भरी नजरें लगाए है।

प्रभुलाल भार्गव का बेटा कमल पीलिया के गंभीर होने के बाद जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज करा रहा है। परिजनों के अनुसार इलाज करने वाले डॉक्टर अजय शर्मा ने लीवर के टिश्यू ट्रांसप्लांट करने की बात कही है। उससे ही इलाज संभव है। टिश्यू बदलने के लिए दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के लीवर का कुछ हिस्सा काटकर लगाना पड़ता है। इसके लिए कमल की छोटी बहन 19 वर्षीय कविता ने अपना लीवर भाई के लिए दान करने की सहमति भी दे दी है।

जानिए : लीवर के बारे में

पेटमें लीवर वह हिस्सा होता है जिसके अंदर हार्ट से भी ज्यादा ब्लड होता है। यूं समझें कि लीवर पूरा ब्लड कंट्रोल सिस्टम होता है। इसमें सिवाय ब्लड के कुछ नहीं होता। इसलिए किसी एक इंसान का लीवर का कुछ हिस्सा काटकर दूसरे इंसान को लगाना बेहद मुश्किल प्रक्रिया होती है। इसका जटिल ऑपरेशन होता है जिसका खर्चा काफी होता है।

पीलिया रोग का असर सीधे लीवर पर पड़ता है। दूषित पानी भोजन से पीलिया होने के बाद लीवर खराब होने लगता है और एक हद तक यह जवाब दे जाता है। सीएमएचओ डॉ. अशोक यादव बताते हैं कि लीवर में खराबी के बाद उसकी एक्टीविटी बंद होने लगती है। इससे बचाने के लिए डॉक्टर लीवर के कुछ हिस्से को फिर से एक्टिव करने का प्रयास करते हैं। इसके लिए ऑपरेशन होता है। ऑपरेशन के दौरान किसी स्वस्थ इंसान का लीवर का हिस्सा काटकर बीमार व्यक्ति के लीवर से लगाते हैं। पहले लगाया गया हिस्सा एक्टिव होता है उसके बाद वह हिस्सा बीमार इंसान के लीवर को फिर से एक्टिव करना शुरू करता है।