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अस्पताल में जेब से 30 हजार रुपए पार, सीसी कैमरा पांच माह से बंद
खुली पोल : वारदात के बाद खुली अस्पताल प्रशासन की पोल, कैमरे तो लगे, लेकिन दिखावे के लिए
कब और कहां : राजकीय जिला अस्पताल के ओपीडी गैलेरी में गुरुवार सुबह 11:00 बजे हुई वारदात
सबसे दुखद रहा यह : जहां वारदात हुई उस स्थान के ठीक पीछे दीवार पर लगा था सीसी कैमरा
पीड़ित कौन : सरकारी व्याख्याता, अस्पताल में भाई की जांच कराने आया था
भास्करन्यूज | नागौर
राजकीयचिकित्सालय में गुरुवार को अपने भाई की जांच कराने पहुंचे सरकारी व्याख्याता की जेब से पर्ची कटवाते समय 30 हजार रुपए पार हो गए। जिस जगह वारदात हुई वहां चार पांच लोग ही खड़े थे। व्याख्याता को जब तक जेब कटने की जानकारी लगी तब तक जेब तराशने वाला गायब हो चुका था। इस दौरान लोगों ने वहां एक दीवार पर लगे सीसी कैमरे में घटना की रिकार्डिंग देखने की बात कही और पीएमओ कक्ष पहुंचे तो पता चला कि अस्पताल के ये खुफिया कैमरे पांच माह से बंद हैं। इससे लोगों में पुलिस अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली के प्रति रोष दिखा।
सर्व शिक्षा अभियान में आरपी के पद पर कार्यरत संजय कॉलोनी निवासी राधेश्याम पुत्र पुरखा राम वैष्णव गुरुवार सुबह अपने भाई भंवर दास को डॉक्टर को दिखाने राजकीय चिकित्सालय लेकर पहुंचा। भाई को डॉक्टर के कमरे में बैठाकर वह ओपीडी पर्ची कटवाने लाइन में लग गया। पर्ची लेकर उसने भाई की जांच करवाई और डॉक्टर की लिखी दवा लेने लाइफ लाइन स्टोर पर पहुंचा। दवा लेने के बाद जैसे ही पैसे देने के लिए उन्होंने जेब में हाथ डाला तो रुपए गायब थे। राधेश्याम ने बताया कि सुबह घर से निकलते समय उन्होंने 29 हजार 705 रुपए जेब में रखे थे। इनमें पांच रुपए अलग थे जो उन्होंने पर्ची कटवाते समय दिए। उस समय नोटों की गड्डी उनकी ऊपरी जेब में थी, लेकिन रुपए गायब मिले। उन्होंने आस पास खड़े व्यक्तियों गार्ड से पूछताछ की, लेकिन रुपए का पता नहीं चला।
बेटेकी फीस के लिए रखे थे रुपए
राधेश्यामका पुत्र राकेश बीकानेर में आईआईटी के लिए कोचिंग कर रहा है। उसकी फीस जमा करवाने के लिए ही उसने यह रुपए साथ लिए थे, लेकिन चोर ने फीस के रुपए पर हाथ साफ कर दिया। अस्पताल में कैमरा लगा देख राधेश्याम ने एक बार तो चैन की सांस ली। वह तत्काल पीएमओ के पास गया, लेकिन वहां जाकर उसकी सारी उम्मीदें टूट गई। पीएमओ डॉ. प्रदीप गुप्ता ने उसे बताया कि कैमरे तो ठीक हैं, लेकिन डिस्प्ले नहीं र