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- ऐसे तो कैसे निखरेंगी प्रतिभाएं, नागौर जिले में 12 खेल संघों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं
ऐसे तो कैसे निखरेंगी प्रतिभाएं, नागौर जिले में 12 खेल संघों का रजिस्ट्रेशन ही नहीं
ग्रामीणप्रतिभाओं वाले जिले में एवरेस्ट फतेह करने वाली डीडवाना की महिला कैप्टन दीपिका राठौड़......पूर्व रणजी खिलाड़ी शमशेर खोखर.....बॉस्केटबॉल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी डीडवाना के हीरेंद्र सिंह राठौड़..... जिम्नास्ट में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुकीं वीर तेजा संस्थान मूंडवा की बालिकाएं...जैसी खूब प्रतिभाएं हैं जिन्हें समय पर अपनी प्रतिभा को तराशने का मौका मिला और ये आगे बढ़ीं....। मगर जिले में ऐसे कई खेल हैं जिनके संघों की उदासीनता की वजह से खिलाड़ियों को उचित प्लेटफार्म नहीं मिल पा रहा। हालात ये हैं कि ऐसे खेल संघों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है। दूसरी तस्वीर जिले में सरकारी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को मिलने वाली सुविधाओं की कमी के रूप में सामने रही है।
यहखेल संघ हैं निष्क्रिय
बाक्सिंगसंघ, टीटी संघ, साइकिलिंग संघ, पावर लिफ्टिंग संघ, बाडी बिल्डिंग संघ, टेनिस संघ, शूटिंग संघ, जूडो संघ, भारोत्तोलन संघ, बाल बैडमिंटन संघ, महिला क्रिकेट संघ, बेस बाल संघ।
इधर सरकारी उदासीनता भी
जिलेमें कई खेलों के तो कोच ही नहीं हैं। आलम यह है कि बॉस्केट बॉल में जिले के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेल चुके हैं मगर नागौर जिले में इस खेल का कोई कोच नहीं है। खिलाड़ियों के लिए सरकारी स्तर पर कोई मैदान या ट्रैक भी नहीं बनवाए जा सके हैं। हाल ही स्कूली राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में इसकी बानगी देखने को मिली जब तैराकी जैसी प्रतियोगिता के लिए उधार के स्वीमिंग पूल से काम चलाना पड़ा। पिछले कई साल से यह प्रतियोगिता गोटन में ही इसलिए करवाना पड़ रही है क्योंकि वहां जेके सीमेंट परिसर में निजी स्तर पर इसकी सुविधा है। जिले में सरकारी स्तर पर कोई तरणताल नहीं है।
यह हैं हालात
खेलसंघों की निष्क्रियता एवं रजिस्ट्रेशन नहीं होने की वजह से खेल अधिनियम 2005 के तहत कार्यकारिणी के चुनाव भी कई वर्षों से नहीं हो पाए हैं। कुछ खेलों में तो यह हालात हैं कि जिला स्तरीय एवं राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए मात्र खानापूर्ति की जा रही है।
यह कहते हैं खेलों से जुड़े लोग
^जिलेमें प्रतिभाओं की कमी नहीं है मगर खेल विभाग पूरी तरह ध्यान नहीं दे पा रहा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूर्व के कार्यकाल में नागौर में दो एकेडमी शुरू हुई थी तो जो आज बंद हैं। खेल विभाग जिले में खिलाड़ियों के लिए सामान तक उप