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बाड़मेर जिले में जन्मे जाए आचार्य डॉ. लोकेश मुनि का 32वां दीक्षा दिवस मनाया
नागौर| बाड़मेरजिले के पचपदरा में जन्मे जाए अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैनाचार्य डॉ. लोकेश मुनि का 32वां दीक्षा समारोह तथा युगपुरुष वीरचंद राघव गांधी की 150वां जयंती समारोह रविवार को अहमदाबाद में धार्मिक माहौल में मनाया गया। इस मौके पर आयोजित ‘अनेकांत दर्शन से वैश्विक समस्याओं का समाधान’ विषयक संगोष्ठी में गुजरात के राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली ने कहा कि दोनों महापुरुषों का भगवान महावीर के अहिंसा, शांति सदभावना के दर्शन को विश्वव्यापी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने अनेकता में एकता पर आधारित भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया। कोहली ने कहा कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। भगवान महावीर के दर्शन और उपदेश का सार्वभौमिक सत्य आधुनिक विश्व के लिए उपयोगी है। कोहली ने इस मौके पर आचार्य लोकेश रचित ग्रंथ का लोकार्पण भी किया।
समारोह में गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने एेसे समसामयिक विषय पर संगोष्ठी आयोजित करने पर अहिंसा विश्व भारती को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान में जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है और हम इनसे जूझने के तरीके तलाश रहे हैं, ऐसे में भगवान महावीर वीरचंद राघव गांधी की शिक्षा दर्शन बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि भारत का लोकतंत्र अनेकांत के सिद्धांत पर आधारित है। भारत की बहुलता वासी संस्कृति ही देश के विकास का आधार है जहां सभी एक दूसरे के विचारों अस्तित्व को सम्मान देते हैं। समारोह में पद्मश्री डॉ. कुमार पाल देसाई ने कहा कि चौदह भाषाओं के ज्ञाता वीरचंद राघव गांधी विभिन्न धर्मों के गहरे जानकार थे। आचार्य सुशील मुनि के शिष्य विवेक मुनि ने आचार्य लोकेश की ओर से विश्व भर में शांति, सदभावना फैलाने, जैन धर्म का प्रचार-प्रसार करने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान चलाने के लिए किए गए प्रयासों से अवगत कराया। डॉ. रूप कुमार अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी का संयोजन लेखक अशोक दवे ने किया। अखिल भारतीय जैन कांफ्रेंस के कोषाध्यक्ष अशोक मेहता ने स्वागत भाषण दिया। अहिंसा विश्व भारती की गुजरात शाखा के अध्यक्ष प्रकाश बागरेचा समन्वयक प्रणव अमीन ने किया। समारोह में कई देशों भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहि