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स्वाइन फ्लू से दो और मौत, दो पॉजिटिव मिले
एक बार इस्तेमाल के बाद टीशू पेपर कुड़े दान में फेंक दें।
2010 में स्वाइन फ्लू का पहला संदिग्ध मिला।
वर्ष मौत
20118
2012 0
2013 10
2014 4
2015 10
...आैर इनकी यह तैयारी
नागौरसीएमएचओ अशोक यादव ने बताया कि विभाग की ओर से रेपिड एक्शन डॉक्टरों की टीमें 11 पंचायत समितियों पर लगाई गई हैं। यह कोई पॉजिटिव मिलने पर तुरंत हरकत में आएगी। इसके साथ पीएचसी और सीएचसी पर मास्क और दवाएं बांटी गई हंै। पीएमओ लेवल के अस्पतालों को खर्च का बजट मिला है। जहां एक डॉक्टर ही लगा है वहां भी संदिग्ध रोगियों को अलग कमरे में देखने की व्यवस्था की गई हंै।
1. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर स्क्रीनिंग की सुविधा नहीं है।
2. समय पर दवा उपलब्ध नहीं होना
3. अस्पतालों, मॉल, मेला, सिनेमाघरों में बिना मास्क प्रवेश
4. गंभीर मरीजों के हिसाब से वेंटीलेटर, बेड अन्य सुविधाओं का अभाव
5. अस्पतालों में भर्ती मरीजों को समय पर टीके नहीं लगना। अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की कमी।
दवा बेअसर
सीएमएचओऔर डॉक्टर खुद यह स्वीकारते हैं कि स्वाइन के इलाज में काम ली जा रही टेमी फ्लू दवा इस साल प्रभावी नहीं हो रही है। जीवाणुओं ने दवा के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा ली है। अब तक 74 मिली ग्राम की डोज देने के बाद भी मरीजों पर असर हो रहा था, लेकिन इस बार 150 ग्राम की मात्रा भी प्रभावी नहीं हो रही है। यही कारण है कि वार्ड आईसीयू में भर्ती मरीजों पर दवा बेअसर होती नजर रही है। इस कारण मौतों की संख्या भी बढ़ रही है।
डॉक्टरोंको वायरस के बदलने की आशंका
डॉक्टरोंने जेनेटिक म्यूटेशन के कारण एच 1 एन 1 वायरस बदलने की आशंका जताई है। मानसून के साथ वायरल संचरण के लिए अनुकूल मौसम लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से जैसे गर्भवती महिला, छोटे बच्चे, कार्डियो वेस्कुलर, अस्थमा, क्रॉनिक लंग डिजीज, डायबिटीज बुजुर्गों में यह वायरस और अधिक आक्रामक अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है।
नागौर। जिलेमें स्वाइन फ्लू एच 1 एन 1 वायरस गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार इसका प्रकोप चार गुना बढ़ गया है, लेकिन बीमारी रोकने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। पिछली साल जहां केवल 4 लोग मौत का शिकार हुए, जबकि इस बार केवल जनवरी से लेकर अब तक 10 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नागौर में फ्लू से होने वाली 10 मौतों में चार महिलाएं थीं। राजस्थान में इस सीजन में सोमवार तक स्वाइन फ्लू रोगियों की संख्या 1002 तक पहुंच गई हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक अधिकारी के अनुसार इलाज में टेमी फ्लू दवा का असर कम होता नजर रहा है। साथ ही यह संभावना भी है कि पिछले साल की तुलना में इस साल वायरस बदलने के कारण ऐसा हो रहा है। साथ ही चुनाव के कारण भीड़ बढ़ना भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार है।
कुचामन में तीन रोगी इलाज के लिए जयपुर रेफर
कुचामनसिटी | क्षेत्रमें लगातार स्वाइन फ्लू संदिग्ध ‘ए’ पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ रही हैं। कुचामन के राजकीय अस्पताल में स्वाइन फ्लू के तीन संदिग्ध और एक फ्लू पॉजिटिव सामने आया है। इनमें से तीन को जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया। एक का अस्पताल में उपचाररत है। कार्यवाहक चिकित्सा प्रभारी डाॅ. शकील राव ने बताया कि बालाजी बाजार निवासी सोनू (32) प|ी दीपक जैन सोमवार सुबह उपचार के लिए पहुंचीं। स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर किया गया। इसी तरह बड़ला बास कुचामन निवासी सुमन (35) प|ी जितेंद्र सिंह छोटी खाटू निवासी कमलेश (15) पुत्र इन्द्र सिंह को भी संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर किया गया। इसी तरह 10 वर्षीय मेघा कंवर को भी स्वाइन फ्लू श्रेणी में रखा गया है और उसे स्थानीय चिकित्सालय मे भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
रिड़में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव को अजमेर भर्ती करवाया
रिड़| ग्रामबाजवास में एक मरीज स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाया गया है। अजमेर के जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में उसका उपचार चल रहा है। बाजवास निवासी चैना राम पुत्र भोपाल राम खटीक कई दिनों से बीमार था। परिजनों ने उसे 6 फरवरी को अजमेर के जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में भर्ती करवाया। बाजवास सामुदायिक चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी प्रभारी डॉ एमएन माथुर ने बताया कि चैना राम की जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने पर डॉ हरीश चद्र बडज़ात्या की देखरेख में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। मरीज की हालत में सुधार होने से उसे वेंटिलेटर ऑक्सीजन पर नहीं रखा गया।
पड़ताल
अपनी आंख, नाक, मुंह को हाथ लगाएं। इससे वायरस फैलते हैं।
छींकने खांसने और कहीं बाहर से आने के बाद हाथ साबुन से धोएं।
खांसी, छींक आने पर मुंह नाक को रुमाल, टीशू पेपर से ढंकें
नागौर. स्वाइन फ्लू खौफ इस तरह है कि अब बासनी क्षेत्र की दुकानों पर मास्क बिक रहे हैं। क्षेत्र की एक दुकान पर से मास्क खरीदते बच्चे।