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अस्पतालों में मुफ्त जांच कराते हैं, लेकिन रिपोर्ट लेने नहीं आते

7 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्रीनिशुल्क दवा योजना के साथ सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच की सुविधा को लेकर लोग गंभीर नहीं हैं। हजारों लोग हर महीने जांच रिपोर्ट लेने के लिए वापस नहीं आते हैं। इसमें पुलिस के कराए गए मेडिकल अन्य जांचें भी शामिल हैं जो सरकार का खर्च बढ़ा रही हैं। पुलिस में कोई भी घटना या मारपीट होने पर मुकदमा दर्ज हो जाता है मगर बाद में राजीनामा होने के बाद पुलिस विभाग भी सभी रिपोर्टों की कॉपी लेने नहीं आता है। नागौर के अस्पताल की लैब में 200 से 250 जांच रोज होती हैं। इन पर 8 से 10 हजार रुपए का खर्च आता है। हर रोज अस्पताल में 70 से 80 एक्स-रे होते है। इन पर रोजाना 5000 रुपए से ज्यादा का खर्च आता है। ज्यादातर सोनोग्राफी, एक्सरे अन्य लैब में होने वाली जांचें लेने में कोई रुचि नहीं दिखाता है। पूरे जिले में हर अस्पताल में यही हालात हैं। अस्पतालों में हजारों मरीजों की जांच रिपोर्ट धूल फांक रही हैं। अस्पातल में आए दिन माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, एक्स-रे, पैथोलॉजी, एवं सोनोग्राफी में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा सकती है। सैकड़ों मरीज जांच कराते हैं मगर बाद में रिपोर्ट ही लेने नहीं आते हैं। ऐसे में आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अस्पताल प्रशासन को लाखों रुपए का प्रति माह नुकसान हो रहा है।

बगैर जांच रिपोर्ट कैसे होगा इलाज

नागौर. नागौरजिला मुख्यालय पर बने राजकीय अस्पताल की लैब।

बेकार की जांचें कराई जाएं

कई मरीजों की तो राजकीय अस्पताल में दो से तीन बार वही जांच करवाई जाती है। इनमें एक्स-रे तथा लैब में ब्लड यूरीन की जांच शामिल है। जानकारी के अनुसार अगर मरीज के हाथ में दर्द है या फिर सिर में अधिकतर दर्द की शिकायत रहती है तो ऐसे में एक्स-रे कराया जाता है। वार्ड में भर्ती होने पर नर्सिंग स्टॉफ भी कई तरह की जांचें कराता है। लोगों का मानना है कि कई मरीजों की तो जांच ऐसे ही करवा दी जाती है। इस प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए और लोगों को भी समझना चाहिए।