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चार्जशीट में मारपीट की एेसी धाराएं क्यों जोड़ी गई हैं, घटित होना एफआईआर में प्रतीत नहीं होता

6 वर्ष पहले
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शिवप्रकाश पुरोहित/अजय कुमार| कुचामन सिटी/नागौर

बहुचर्चितहैड कांस्टेबल फैज मोहम्मद हत्याकांड मामले में पुलिस ने 30 जनवरी को न्यायालय में चार्जशीट पेश की, लेकिन केस ऑफिसर स्कीम के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा निर्देशन मंे तैयार की गई इस चार्जशीट में भी कई खामियां छोड़ पुलिस प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को फायदा पहुंचाने में जुटी नजर रही है।

गत वर्ष 15 नवंबर को पुलिस की हार्डकोर आरोपी विजेंद्र सिंह इंडाली और मदन सिंह के साथ मुठभेड़ हुई थी और इस मुठभेड़ में हैड कांस्टेबल फैज मोहम्मद
चार्जशीट में मारपीट की एेसी धाराएं क्यों जोड़ी गई हैं, घटित होना एफआईआर में प्रतीत नहीं होता

धारा325, 326 सभी फैज मोहम्मद, एसएचओ अन्य पुलिस कर्मियों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लगाई गई है। आरोपियों ने मारने के लिए बंदूक का बट, गोली, धारदार हथियार सब का इस्तेमाल किया। एक गोली लगी फैज घायल हुआ तो 307, दूसरी में मरा तो 302 लगाई। रिपोर्ट्स और अनुसंधान के हिसाब से एक एक धारा जोड़ी गई है।

मेडिकलमुआयने का समय 1.30 बजे है और घटना का समय 1.45 बजे, यह गड़बड़ी कैसे

यहगलती से हो गया, एक्चुअल में मेडिकल का समय 3.30 बजे है।

कांस्टेबलपरमाराम एक समय में दो जगह कैसे पहुंचा

नहींऐसा नहीं है। बिना मतलब के ही बात को कुछ लोग गलत ढंग से पेश कर हवा दे रहे हैं। सारा मामला एफआईआर के अनुसार है। हमने पूरी निगरानी रखी है। कांस्टेबल एक समय नहीं अलग-अलग समय पहुंचा था।

दुनालीसे 10-12 फायर की बात कुछ गले नहीं उतर रही

दुनालीबंदूक से उसने बार-बार गोलियां भरकर फायर किए थे। घटनास्थल पर पांच से छह बंदूकें थीं। इनमें से तीन बंदूकों से फायर हुए। यह तीनों कौन सी थीं और किस से फैज को गोली लगी, यह बात एफएसएल रिपोर्ट के बाद ही पता चल पाएगी।

एसपी एचजी राघवेंद्र सुहासा से भास्कर की सीधी बातचीत

चार्जशीट में लिखा गया है कि घटना वाले दिन जब पुलिस ने आरोपियों की गाड़ी का रास्ता ब्लॉक किया तो चालक सीट से विजेंद्र सिंह और पास वाली सीट से मदन सिंह नीचे उतरे। पुलिस के मुताबिक विजेंद्र के हाथ में दुनाली बंदूक और मदन सिंह के हाथ में रिवाल्वर थी। गाड़ी से उतरते ही विजेंद्र ने पुलिस पर 10-12 राउंड फायर किए। इनमें से कुछ पुलिस जीप पर लगे और दो फायर जाब्ते में मौजूद फैज मोहम्मद के लगे। दुनाली बंदूक से एक समय दो कारतूस ही चलाए जा सकते हैं। 10 -12 राउंड तो ऑटोमैटिक हथियार से ही चल सकते हैं।

चार्जशीट में पुलिस ने 15 नवम्बर 2014 को दोपहर करीब पौने दो बजे की घटना होना बताया। यह घटना कुचामन मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर हुई, लेकिन चार्जशीट में इस घटना में घायल होने वालों के मेडिकल जांच का समय उसी दिन दोपहर डेढ़ बजे दर्शा दिया।

नतीजा

आरोपियोंका वकील इन विरोधाभासी तथ्यों, खामियों आैर रिपोर्टों को एवीडेंस के रूप में पेश कर जमानत की कोशिश कर सकता है। इन पर बहस के दौरान यह सारे रिकॉ‌र्ड आगे जाकर केस को कमजोर करेंगे आरोपियों के बाहर आने के रास्ते खुलेंगे।

एक ही समय पर परमा राम का दो जगह उपस्थित होना अनुसंधान में लापरवाही को दर्शाता है।

मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस की रिपोर्ट यह दोनों दस्तावेज विरोधाभासी तथ्य पेश कर रहे हैं।

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केस ऑफिसर स्कीम के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में तैयार हुई थी चार्जशीट लेकिन ऐसे पाइंट्स का उल्लेख जिनका जांच में जिक्र नहीं, ऐसे विरोधाभासी तथ्य जो आरोपियों को दिलवा सकते हैं राहत

पुलिस पर हमला करने के मामले में आज पेश होगी चार्जशीट

गत वर्ष पुलिस हैड कांस्टेबल फैज मोहम्मद की हत्या करने के बाद फरार हुए अभियुक्तों को पकड़ने गए पुलिस दल पर फायरिंग करने के मामले मे अभियुक्त विजेंद्र सिंह और मदन सिंह के खिलाफ गुरुवार को चार्ज शीट पेश होगी। अभियुक्त विजेंद्रसिंह, मदनसिंह और दौलत बानो को बुधवार को कुचामन न्यायालय में पेश किया गया। बुधवार को कोर्ट में फैज मोहम्मद की हत्या के मामले को परबतसर एडीजे कोर्ट मे स्थान्तरित करने को लेकर सुनवाई होगी जिसके बाद इस मामले को परबतसर एडीजे कोर्ट मे स्थान्तरित करने के आदेश दिए गए। अब इस मामले मे 23 फरवरी को परबतसर एडीजे कोर्ट मे सुनवाई शुरू होगी।

ऑटोमैटिक हथियार होने के बावजूद दुनाली बंदूक से बार बार गोलियां भरकर चलाना और बाद में दुनाली की बरामदगी नहीं होना, कतई गले नहीं उतरता

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चार्ज शीट में जगह, समय, हथियार और घटना को लेकर पुलिस खुद ही कन्फ्यूज नजर रही है।

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मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस की रिपोर्ट यह दोनों दस्तावेज विरोधाभासी तथ्य पेश कर रहे हैं।

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थानाधिकारी सुरेश सोनी ने बयानों में बताया है कि वारदात में फैज मोहम्मद को गोली लगी थी और उसके बाद आरोपी घटनास्थल पर स्कार्पियो गाड़ी छोड़कर फरार हो गए। स्कोर्पियो की सुरक्षा के लिए कांस्टेबल परमाराम को मौके पर छोड़कर अन्य जाब्ता फैज मोहम्मद को लेकर कुचामन रवाना हुआ। यदि परमाराम को गाड़ी की सुरक्षा के लिए घटनास्थल पर छोड़ा गया था तो फिर उसी दिन दोपहर डेढ़ बजे थानाधिकारी अन्य कांस्टेबलों के साथ उसकी मेडिकल जांच कैसे हो सकती है।

पुलिस ने चार्जशीट में आईपीसी की धारा 34, 323,324,325,326,332,333,336,337,338,353,355,341,307,300,302,120 बी, आर्म्स एक्ट की धारा 3/25, 7/27 और 7/27(2) लगाई है। इसके साथ ही पीडीपीपी एक्ट सरकारी संपति को नुकसान पहुंचाने की धारा भी जोड़ी है। धारा 325 में लाठी, पत्थर या किसी भौंटे हथियार (बिना धार) से मारपीट कर फैक्चर करने या दीवार से टकराने के अपराध आते हैं। धारा 326 धारदार हथियार से वार करने पर लगाई जाती है, जबकि एफआईआर में इस तरह का कहीं भी उल्लेख नहीं है कि आरोपियों ने पुलिस के साथ लाठी या धारदार हथियार से मारपीट की हो।