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रागों के संगम पर झूमे मेहमान

6 वर्ष पहले
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किलेमें चल रहे वर्ल्ड सूफी स्पिरिट फेस्टिवल के दौरान अहिछत्रपुर दुर्ग की प्राचीरों से कला का संगम कानों आंखों से होकर दिल में उतर रहा था। ठंडे सूरज की मानिंद चांद की तेज होती रोशनी सा यह माहौल जैसे दुनिया में मोहब्बत के नए गुलसितां काे महका गया।

कलाकी गूंज से जागा इतिहास

अहिछत्रपुरका ऐतिहासिक बख्त चौक और वहां से गूंजती चीन की प्रकृति और सौंदर्य की एक समकालीन आवाज, दीवान- ए- आम से निकलता मध्य एटलस की कवयित्री चेरिफा की जुबां और उनके साथियों के साज से जो आवाज निकली वो किसी हरी भरी घाटी से बीहड़ भूमि की ओर आती प्रकृति की मूल पहचान और राग यमन का बेहतरीन संगम, हाड़ी रानी महल में रेगिस्तानी धोरों की पहचान लंगा मंगणियारों का वो मोहब्बत भरा संदेश जो दुनिया की सीमाओं पर मोहब्बत बरसाने का संदेश दे रहा था।