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‘सूर्य नमस्कार का धर्म से ताल्लुक नहीं, ये तो योग है’

6 वर्ष पहले
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नागौरविधायक हबीबुर्रहमान द्वारा मुख्यमंत्री से स्कूलों में सूर्य नमस्कार की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग के बाद बुधवार को नागौर के विभिन्न धार्मिक संगठनों, ट्रस्ट और व्यापार मंडल ने इसका विरोध किया।

गायत्री परिवार ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी भोजराज सारस्वत ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेज सूर्य नमस्कार को लागू रखने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि यह किसी धर्म से ताल्लुक नहीं रखता बल्कि सूर्य नमस्कार एक बरसों पुरानी यौगिक क्रिया है। इससे शरीर को शक्ति मिलती है। शारीरिक, मानसिक बौद्धिक शक्ति का विकास होता है। इसका किसी धर्म विशेष से कोई लेना देना नहीं है। इसमें दस प्रकार के योग होते हैं। किसी भी वर्ग और धर्म के विद्यार्थी के लिए शरीर को स्वस्थ रखना जरूरी है। इसी प्रकार धार्मिक उत्सव आयोजन समिति के उम्मेदराज शर्मा ने बताया कि यह एक प्रकार का आसन है। स्कूलों से इसकी अनिवार्यता हटाना गलत होगा। इससे बीमारियों से छुटकारा मिलता है। एक ओर पूरा विश्व योग अपना रहा है। ऐसे में हम इसे कैसे अपने बच्चों से दूर कर सकते हैं। इसकी महत्ता को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया। पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के श्रीगोपाल चांडक, भारत विकास परिषद के हरिराम धारणियां, धार्मिक समिति के सत्यनारायण पारीक, सेवा भारती के पुरुषोत्तम राजवंशी, परशुराम जयंती समिति के गणपत लाल जोशी सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने विधायक से अपनी इस मांग को वापस लेने का कहा है।