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मिर्धा और बिंदु चौधरी परिवार की लड़ाई में भाजपा का बहुमत हारा
जिला प्रमुख चुनाव में बड़ा उलटफेर करते हुए बहुमत हासिल कर चुकी भाजपा से कांग्रेस ने चार वोट छीनकर नागौर जिला प्रमुख का पद हथिया लिया। कांग्रेस यहां 22 वोट भाजपा 25 वोट के साथ बहुमत के साथ आई थी। जब जिला निर्वाचन अधिकारी ने परिणाम सुनाया तो 26 वोट कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता के खाते में आए भाजपा प्रत्याशी बिंदु चौधरी को 21 मत मिले। सुनीता चौधरी 5 वोट से जीतकर जिला प्रमुख बन गईं।
पूर्व सांसद रामरघुनाथ चौधरी और रिछपाल मिर्धा का परिवार डेगाना विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। दोनों परिवारों में पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। पूर्व सांसद रामरघुनाथ चौधरी के निधन के बाद यह परिवार राजनीति में कमजोर हुआ। मिर्धा परिवार का कांग्रेस में दबदबा था। इस बीच बिंदु चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गई। वर्ष 2008 में बिंदु ने अपने भाई अजय किलक को डेगाना से भाजपा का टिकट दिलाया। अजय ने रिछपाल मिर्धा को विधानसभा चुनाव में हरा दिया। इसके ठीक एक साल बाद बिंदु ने लोकसभा का चुनाव 2009 में भाजपा से लड़ा तब कांग्रेस के पास कोई विकल्प नहीं होने पर रिछपाल मिर्धा की भतीजी ज्योति मिर्धा को उनके सामने लाया गया। ज्योति मिर्धा ने भाजपा की सशक्त मानी जाने वाली दावेदार बिंदु को हरा दिया। ज्योति मिर्धा का वहां से नागौर की राजनीति में पर्दापण हुआ। इसके ठीक एक साल बाद 2010 में पंचायतीराज चुनाव हुए तो बिंदु चौधरी ने ज्योति के चाचा रिछपाल को जोड़तोड़ कर हरा दिया। सिलसिला यहीं नहीं रूका। कांग्रेस में फूट पड़ी तो बिंदु चौधरी की भी उसमें भूमिका रही। इसके बाद 2013 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए। बिंदु के भाई अजय किलक रिछपाल मिर्धा फिर आमने सामने हुए तो अजय ने फिर से रिछपाल मिर्धा को हराया।