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आयशा का ऑस्ट्रेलिया में गर्भाशय कैंसर पर रिसर्च के लिए चयन

7 वर्ष पहले
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नागौर| ऑस्ट्रेलिया सरकार की ओर से मूलत: नागौर और हाल जोधपुर निवासी आयशा साबिर का गर्भाशय के कैंसर पर रिसर्च के लिए चयन किया गया है। नागौर की पीएचईडी कॉलोनी हाल बंगाली क्वार्टर्स जोधपुर के कमला नेहरू नगर में रहने वाली आयशा साबिर यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कैसल, आस्ट्रेलिया की स्कूल ऑफ बायो मेडिकल साइंसेस एंड फार्मेसी की फैकल्टी ऑफ हेल्थ एंड मेडिसिन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक प्रो. हबर्ट हॉडंरमार्क और प्रो. प्रदीप तंवर के साथ ‘वेंट सिग्नलिंग इन यूटेरिन कैंसर’ पर शोध करेगी। इस शोध के लिए पूरे विश्व से शोधार्थियों से आवेदन मांगे गए थे। कई दौर की परीक्षाओं और साक्षात्कार के बाद अकेली आयशा का चयन हुआ है। आयशा को इस शोध कार्य के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप स्टाइपेंड मिलेगा। इसमें 65 लाख रुपए प्रोग्राम फीस और 80 लाख रुपए व्यक्तिगत स्कॉलर शिप होगी। अक्टूबर 2014 से अक्टूबर 2018 तक की प्रारंभिक अवधि में आयशा वहां महिलाओं में होने वाले गर्भाशय के कैंसर के कारणों और रोकथाम पर गहन शोध करेगी। वे 20 अक्टूबर को सिडनी, आस्ट्रेलिया के लिए रवाना होगी। इससे पहले आयशा को यूनिवर्सिटी ऑफ मलेशिया, कुआलालम्पुर से भी रिसर्च ऑफर मिल चुका है। यह आरंभ से ही प्रतिभाशाली छात्रा रही है। हाल ही में उन्होंने भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नेशनल सेन्टर ऑफ एक्वेटिक एनीमल हेल्थ, कोच्चिं से फिन फिशेज में कॉई हार्पीस वायरस पर शोध किया है। इस शोध के लिए भी वे भारत सरकार की स्कॉलरशिप पर कार्य कर रही थी। जोधपुर की वीवी जॉन स्कूल, सोहनलाल मणिहार स्कूल से राष्ट्रीय स्तर की लेबोरेट्री और अब ऑस्ट्रेलिया में शोध के लिए जाने वाली आयशा, अपनी इस उपलब्धि को परवरदिगार, शिक्षकों और माता-पिता का आशीर्वाद मानती है। उन्होंने बातचीत में बताया कि वे हमेशा से ही महिलाओं की बीमारियों के प्रति संवेदनशील रही है। आयशा की माता तस्नीम अली स्कूल टीचर है और पिता नागौर निवासी सैयद साबिर अली जोधपुर आकाशवाणी में प्रोड्यूसर हैं।