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एक साल में नसंबदी के 51 केस फेल, दो मौतें, टारगेट रहा अधूरा
नसबंदी के दौरान मौत होने पर दो लाख की राशि
जिलेमें इस वर्ष परिवार कल्याण विभाग को कुल 24 हजार 889 नसबंदी करने का टारगेट दिया गया था, जिसमें से अब तक एक तिहाई यानी 7168 नसबंदी ही हो पाई है।
इसके पीछे प्रमुख कारण जिले में एक साल में 51 महिलाओं की नसबंदी फेल होना और दो महिलाओं की मौत होना बताया जा रहा है। उधर, प्रचार-प्रसार भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आमजन का नसबंदी शिविर से विश्वास उठता जा रहा है। इसके चलते विभाग को टारगेट पूरा करने में पसीने रहे हैं। उधर, सरकार प्रति महिला पुरुष नसबंदी केस फेल होने पर मुआवजा भी देती है, लेकिन पै डिंग की सूची लंबी है।
51 महिलाओं की नसबंदी फेल
अप्रैलसे नवंबर 2014 तक के आंकड़े में नसबंदी कैंप के दौरान जिले भर में 51 महिलाओं की नसबंदी फेल हो चुकी हैं। ऐसे में विभाग नसबंदी को लेकर कितना सजग है ये आंकड़े बता रहे हैं। केस फेल होने के दौरान प्रति महिला को 30 हजार रुपए देने का प्रावधान है, लेकिन यह राशि भी नहीं दी गई है। साथ ही नसबंदी करवाने वाली महिलाओं पुरुषों का भुगतान भी विभाग द्वारा समय पर नहीं हो रहा है।
नहीं बता पाए आंकड़े
परिवारकल्याण के अधिकारी एवं कर्मचारी 2014 से पहले के नसबंदी कैंप के दौरान फेलियर की सूची भुगतान के आंकड़े ही नहीं दे पाए। विभाग का कहना है कि केवल 51 फेल है, जबकि इससे कहीं ज्यादा फेल है। जिनका भुगतान लाखों रुपए का विभाग की ओर से अटका हुआ है।
नसबंदी करवाने पर महिलाओं को 1400 पुरुषों को 2000 रुपए देने का प्रावधान है। महिलाओं की डिलीवरी के सात दिन के भीतर नसबंदी करवाने पर 2200 रुपए का प्रावधान है। इसके अलावा एनजीओ की तरफ से 1000 रुपए देने का भी प्रावधान है। नसबंदी के दौरान 24 घंटे के भीतर महिला की मौत हो जाने पर 2 लाख रुपए देती है। नागौर जिले में हालत यह हैं कि चिकित्सा विभाग नसबंदी के केस फेल होने या किसी भी स्थिति में राशि देने को लेकर सजग नहीं है।
डॉक्टरों की कमी से पूरे नहीं हो रहे टारगेट
^हां...यहसच है कि जिले में नसबंदी के टारगेट पूरे नहीं हो पाए हैं। जिले में पांच सर्जन हैं, ऐसे में डॉक्टरों की कमी के चलते नसबंदी के टारगेट पूरे नहीं हो पा रहे। नसंबदी के जो केस फेल हुए हैं, उनका भुगतान कर रहे हैं। जो भुगतान बाकी है, उनमें राज्य स्तर पर त्रैमासिक बैठक के तहत नाम शामिल कर विचार किया जाता है।