पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • \"अगर ऑक्सीजन होती तो बच जाता मेरा भाई\'

\"अगर ऑक्सीजन होती तो बच जाता मेरा भाई\'

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नागौर हाईवे पर जानलेवा मोड़ ने ली फौजी सहित 3 लोगों की जान

डेहरोड स्थित सुशील ऑयल मिल के सामने एनएच 65 पर जानलेवा मोड़ ने सोमवार शाम आठ बजे के करीब फिर तीन जान ले ली। मरने वालों में एक फौजी सहित दो युवक शामिल हैं। यह घटना कुछ इस तरह घटी कि प्रत्यक्षदर्शी भी हैरत में रह गए। मौके से गुजर रहे एक ट्रोले ने नागौर की ओर से जा रही बाइक को पीछे से टक्कर मारी और वह उछल कर सामने से रही दूसरी बाइक पर जा गिरी। इससे सामने से रही बाइक पर सवार तीन में से दो जनों की मौत हो गई। उधर, उछलने वाली बाइक के दो सवारों में से एक ने दम तोड़ दिया। डेह की तरफ से रही बाइक सवारों में एक फौजी था जिसे छोड़ने के लिए उसके दो साथी नागौर रहे थे। सूचना मिलने के करीब दो घंटे बाद तक सदर थाना पुलिस मौके पर नहीं पहुंच सकी। नागौर 108 एंबुलेंस के ईएमटी जितेंद्र सेंवर पायलट आशु सिंह ने घायलों को राजकीय अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद एक को भर्ती कर लिया और एक को जोधपुर रेफर कर दिया गया।

अस्पताल चौकी के शैतान राम, नेमीचंद सहित पुलिसकर्मियों ने बताया कि सुरपालिया थानांतर्गत डोडू माजरा निवासी रेवंत राम फौजी (42) पुत्र चैनाराम जाट को ड्यूटी पर पहुंचाने के लिए उसके रिश्तेदार बीकानेर अंतर्गत सांडवा थाना के लालगढ़ निवासी काना राम (20) पुत्र चैना राम ढाका श्रवण (21) पुत्र सुख राम जाट उसे बाइक पर लेकर नागौर रहे थे। इसी दौरान जायल थाने के रोटू निवासी रामनिवास (30) पुत्र हरू राम विश्नोई सुंदर (25) पुत्र शंकर लाल विश्नोई बाइक लेकर नागौर से गांव जा रहे थे। नागौर की ओर से रहे एक ट्रोले ने रामनिवास के बाइक को टक्कर मारी। उनकी बाइक उछल कर सामने से रही रेवंत की बाइक पर जा गिरी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

प्रशासन भी ध्यान दे

गौरीका कहना है कि मैंने स्वयं दोनों घायलों को लोगों की मदद से एंबुलेंस से उतारा था। उन्होंने यह भी बताया कि 108 एंबुलेंस में दो लोग थे। इनमें एक चालक था। गौरी का कहना है कि अगर आगे से भी प्रशासन संकट के समय काम आने वाली जीवनरक्षक जरूरतों पर ध्यान दे तो लोगों की जान बचाई जा सकती है। उनके भाई की भी जान बचाई जा सकती थी मगर यह लापरवाही उसकी मौत का कारण बनी। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्थाओं में सुधार का आग्रह भी किया है।

तब चल रही थीं सांसें

सोमवारको जावेद गौर