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समर्थन मूल्य पर खरीद होने से किसानों को घाटा
किसानमहापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि न्यूनतम मूल्य पर खरीद नहीं करने से किसानों को मूंगफली, बाजरा, मक्का जैसी फसलें 1500, 250, 350 रुपए प्रति क्विंटल घाटा उठाकर बेचना पड़ रहा है।
देश के अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों को यूरिया के लिए लाइन में खड़े होकर पुलिस के डंडे खाने पड़ रहे। सारे दिन लाइन में खड़े रहने एवं अपमानित होने के बाद भी खाली वापस लौटना पड़े, देश के लिए अन्न उत्पादन करने वालों की ऐसी दुर्दशा शासन करने वालों की क्षमता नीयत पर प्रश्न चिह्न है। जाट ने कहा कि 282 रुपए कीमत का खाद का कट्टा कालाबाजारी में 450 रुपए में लेना पड़े, यह प्रदेश देश की खुशहाली के साथ खिलवाड़ है।
नैनवां डाक बंगले में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मूंगफली का 69,73,520 क्विंटल, बाजरा का 27,88,579 क्विंटल, मक्का 14,59,280 क्विंटल उत्पादन हुआ, जबकि मूंगफली का न्यूनतम मूल्य 4000 रुपए प्रति क्विंटल, बाजरा का 1250, मक्का 1250 रुपए प्रति क्विंटल है और इनका बाजार भाव प्रति क्विंटल क्रमश: 2500, 1000 999 रुपए है। इस न्यूनतम मूल्य बाजार मूल्य में अंतर होने के कारण किसानों की फसल न्यूनतम मूल्य पर खरीद नहीं करने से 11 अरब 66 करोड़ 81 लाख 72 हजार रुपए का घाटा हुआ। यदि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करती, तो यह राशि किसानों की जेब में आती। इससे मांग पूर्ति का चक्र गतिमान होता और प्रदेश एवं देश में खुशहाली आती। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य सन 1965 से आरंभ हुए, तब से लेकर अब तक सरकार ने घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं की और ही खरीफ के लिए कोई तंत्र तैयार किया। 49 वर्षों से किसानों की लगातार उपेक्षा के कारण राष्ट्रीय उत्पाद में कृषि की भागीदारी 55.6 प्रतिशत से घटकर 13.6 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि इसका स्थाई समाधान कानून निर्माण है। इसके लिए किसानों जागो-जगाओ और किसान विधेयक पारित कराओ के साथ जागरण यात्रा प्रारंभ की है।
किसानों की समस्या बताते किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट।