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मंदिर बनाने के बजाय गांव वाले अपने ही पैसों से बनाने लगे तलाई

5 वर्ष पहले
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500-600 फीट पर भी नहीं निकला था ट्यूबवैलों में पानी

मंदिर बनाने के बजाय तलाई निर्माण का किया फैसला: ग्रामीणोंने बताया कि बागेड़ा गांव के सभी किसानों का सरसों का कांट (भूसा) 2 लाख 75 हजार रुपए में बेचा गया। इस राशि से गांव में माताजी के मंदिर का निर्माण कराने की योजना थी, लेकिन 10 दिन पूर्व गांव के लोगों ने पंचायत की और सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि मंदिर निर्माण तो बाद में करवा लेंगे। पहले इसी राशि से तलाई का निर्माण कराया जाए, ताकि बरसाती पानी का संचय किया जा सके। तलाई में आने वाले पानी से भूमिगत जलस्तर में बढ़ोतरी होगी। इससे सालभर पीने का पानी फसलाें के लिए सिंचाई का पानी मिल सकेगा। पंचायत में निर्णय लेने के बाद ग्रामीणों ने तलाई निर्माण की ठान ली ओर जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से तलाई का निर्माण शुरू कर दी। ग्रामीणों ने बताया कि तलाई निर्माण में राशि की कमी आएगी तो गांव का प्रत्येक परिवार इसमें नकद राशि का भी सहयोग करेगा, लेकिन तलाई का पूरा निर्माण कराकर ही दम लेंगे।

पेयजलसंकट से जूझ रहे बागेड़ा गांव के लोगों ने इस वर्ष इस संकट का स्थाई समाधान बिना किसी सरकारी सहायता के अपने बलबूते पर करने की ठान ली है।

जनसहभागिता से इस वर्ष माताजी मंदिर का निर्माण करने की बजाय गांव में 25-30 बीघा भूमि पर राम तलाई बनाने का कार्य शुरू करने की अनूठी पहल की है, ताकि भूमिगत जलस्तर में वृद्धि हो सके और वर्ष भर सिंचाई पीने का पानी आसानी से मिल सके। बागेड़ा गांव नैनवां से 9 किलोमीटर दूर है। 60 घरों की इस बस्ती की आबादी 250 से अधिक है। इस गांव में एक छोटी सी तलाई बनी हुई है। इसको राम तलाई के नाम से पुकारा जाता है।

क्योंमहसूस हुई तलाई की आवश्यकता

ग्रामीणसुखपाल, बद्रीलाल ने बताया कि उन्होंने अपने अपने खेतों पर 500-600 फीट गहरे ट्यूबवैल के बोर करवाए, लेकिन सभी सूखे निकले। गांव के ही राकेश चौधरी, बद्रीलाल, मनराज, रामसागर, रामदेव गुर्जर, मदन पासवान, रामदेव चाड, आशाराम डोई ने बताया कि गांव में अन्य किसानों ने भी अपने अपने खेतों पर दस-दस बोर लगाए, लेकिन सभी सूखे थे। गांव में स्थिति यह है कि भूमिगत जलस्त्रोतों में दीपावली (नवंबर माह) के समय ही पानी रीत गया और किसानों के सामने सिंचाई के पानी का गंभीर संकट गया। इतना ही नहीं गर्मी का मौसम आते-आते पीने के पानी का भी संकट उत्पन्न हो जाता है।

नैनवां। तलाई में सहयोग करने वाले ग्रामीण।

नैनवां। बागेड़ा गांव में रामतलाई की पाल का निर्माण करने के लिए डाली जा रही मिट्‌टी।

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