अच्छे कर्मों को जीवन में उतारंे: मुनिश्री
भगवान इंद्र की प्रतिष्ठा के बाद हुई शांतिधारा और जिनाभिषेक
शहरमें आर्यिका विशुद्धमति माताजी के 67वें जन्म जयंती महोत्सव के दाे दिवसीय कार्यक्रमों की शृंखला मंगलवार को गढ़चौक में सर्वाथसिद्धि श्रीआदिनाथ मंडल विधान की स्थापना कर पूजन किया गया। पूजन की शुरुआत सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडल शुद्धि, आचार्य निमंत्रण, जिनाभिषेक, शांतिधारा के बाद हुआ। पं. नरेंद्रकुमार जैन शास्त्री के निर्देशन में हुई।
दोपहर 2.30 बजे माताजी ससंघ को कार्यक्रम स्थल पर जुलूस के रूप में लाया गया। इस अवसर पर केसरिया परिधान धारण किए इंद्र-इंद्राणियों ने उड़ती पुखइया संदेशों मेरो लेती जादू जै रे पारस प्यारा लागौ, चवलेश्वर प्यारा लागौ एक बार आवो जी महावीरा म्हारे पावणा भजनों पर भक्ति नृत्य किया। संगीतमय पूजन के साथ सभी इंद्र-इंद्राणी ने अष्टदृश्य का अर्ध्य चढ़ाया। बुधवार को प्रत्युषवेला में 3.45 बजे मंगलनाध वाद्य एवं संगीत की सुमधुर ध्वनी से पूरा वातावरण गुंजायमान होगा। सवा सात बजे जिन प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा के साथ अर्घ्य समर्पण कर विशेष पूजा की जाएगी।
येआयोजन भी हुए: इसकेबाद प्रथम सत्र में 8.15 बजे गढ़चौक में चित्र अनावरण, चित्रामुख दीप प्रज्जवलन, रजत पुष्पवृष्टि, प्रवचन कार्यक्रम होंगे। इसके मुुख्य अतिथि कोटा सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष अजय बाकलीवाल होंगे। द्वितीय सत्र में सवा दो बजे विशुद्ध विनयाज्जलि सभा होगी। इसमें आर्यिका विशुद्धमति माताजी को शास्त्र, पिच्छी वस्त्र भेंट किए जावेंगे। द्वितीय सत्र के मुख्य अतिथि कोटा के कैलाशचंद सरार्फ होंगे। मुख्य वक्ता दिल्ली के प्रजिष्ठाचार्य टीकमचंद जैन होंगे।
नैनवां। श्रीमंडल विधान पूजन में भजनों पर नाचते इंद्र-इंद्राणी।