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नसीराबाद में पार्टी नहीं, प्रत्याशी की छवि हारी

7 वर्ष पहले
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अजमेर। नसीराबाद विधानसभा उप चुनाव में भाजपा नहीं बल्कि प्रत्याशी की हार हुई है। पार्टी ने जो उम्मीदवार उतारा, मतदाताओं ने उसे नकार दिया। गुर्जरों ने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में भरपूर मतदान किया, लेकिन जाट बाहुल्य इलाकों में भाजपा को भरपूर वोट नहीं मिल पाए।
कई मतदान केंद्रों पर तो कांग्रेस प्रत्याशी को भी काफी वोट मिले। तुलनात्मक दृष्टि से कांग्रेस का प्रत्याशी भाजपा उम्मीदवार पर भारी पड़ा। यह निष्कर्ष निकला, भाजपा की नसीराबाद में हार का। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शनिवार को जयपुर में हार की समीक्षा की। इसके लिए उन्होंने क्षेत्र में लगाए गए सेक्टर प्रभारी प्रभारी समेत अन्य नेताओं को बुलाया था।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सभी प्रभारियों से हार के कारणों का लिखित विवरण लिया। सूत्र बताते हैं कि प्रभारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में बताया कि नसीराबाद में भाजपा नहीं, बल्कि प्रत्याशी की हार हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भाजपा पर प्रत्याशी सरिता गैना के जिला प्रमुख का कार्यकाल भारी पड़ा। प्रभारियों को गैना के कार्यकाल को लेकर प्रचार अभियान के दौरान बहुत सारी बातें सुनने को मिली। हालांकि इस दौरान भाजपा प्रत्याशी सरिता गैना ने कहा बताया कि चुनाव में सभी ने मेहनत की है पर उनकी किस्मत खराब थीं जो हार गईं।

मालूम हो कि विधानसभा चुनाव में सांवर लाल जाट ने कांग्रेस के महेंद्र सिंह गुर्जर को 29 हजार 800 मतों से हराया था जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नसीराबाद क्षेत्र से 10 हजार 800 मतों से पिछड़ना पड़ा था। भाजपा के पास दस हजार से अधिक की लीड के होने के बावजूद चार माह में ही कांग्रेस ने लीड कवर करते हुए भाजपा को 386 मतों से पराजित कर दिया।

गिनाए हार के कारण

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चुनाव में लगे सभी प्रभारियों सेक्टर प्रभारियों को 22 सितंबर को अपने-अपने क्षेत्र गांवों में जाकर कार्यकर्ताओं जनता का आभार जताने को कहा है। सभी प्रभारी इस दिन नसीराबाद क्षेत्र का दौरा करेंगे।