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राजनीति के घाट पर भई नेतन की भीड़...

7 वर्ष पहले
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नाथद्वारा | नगरकी साहित्यिक संस्था साहित्य मंडल की मासिक काव्य गोष्ठी साहित्य मंडल सभागार में शनिवार शाम को रखी गई। शुरुआत शाम सात बजे हुई, यह देर रात तक चली। इसमें कवियों साहित्यकारों ने प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

गोष्ठी की अध्यक्षता श्रीजी मंदिर के पूर्व बड़े मुखिया नरहरी ठक्कर ने की। अतिथि कथा वाचक मदनमोहन शर्मा, साहित्यकार सदाशिव श्रोत्रिय, जवानसिंह सिसोदिया, संस्था के प्रधानमंत्री श्यामप्रकाश देवपुरा सहित कई नगरवासी उपस्थित थे। काव्य गोष्ठी की शुरुआत भगवान बंशीवाल ने वंदना है मां शारदे, वरदान अपार दे... से की। हरिसिंह कुमावत ने लंकापति भरतार मैं कैसे तुझको समझाऊं..., श्याम पुरोहित ने राजनीति के घाट पर भई नेतन की भीड़, गरीबदास चंदन घिसे तिलक करे बलवीर... तथा नानी मूंछा माथे नहीं बाल शैम्पू लगावे म्हारो नाथूलाल... सुनाई। नंदकिशोर गौरवा ने हिंदी है संस्कार हमारा, नए चमन के मालियों नए फूल की डालियों...,धर्मचंद मेहता ने प्रताप पर खंड काव्य की प्रस्तुति, डॉ. कमला मुखिया ने साहित्य मंडल की परिभाषा को बताया। सुंदर वर्मा ने देवपुरा के चरणां में शत-शत नमन..., जवान सिंह सिसोदिया ने जख्मी परिंदा है, वार मत करना खून मुंह लग जाए तो कुत्तों को..., म्हारी घरवाली बोली हरिद्वार कोनी देख्यो सारी उमर जाती री... सुनाई। भंवर चपलोत ने बादलों के डबडबाये नयन से लुढ़क कर बूंदें धरा पर गिरती है जब..., प्रमोद शर्मा ने आयो जशोदा को लाल नंदनंदन गोपाल, एक नगर की सेर कराऊं..., जितेन्द्र सनाढ्य ने ब्रजभाषा में काव्य प्रस्तुत किया। गिरीश विद्रोही ने ऐशो कर आराम जीवन वे भी गुजार सकते थे..., जागे-जागे-जागे-जागे नंदलाल... से श्रोताओं की तालियां बटोरी। तुलीदास सनाढ्य ने अखियन से आंसू बरसे रे कुछ कहने को मन में..., नगेन्द्र मेहता ने अच्छे दिन अच्छी सौगात एक श्रेष्ठ भारत..., शशिकांत महाकाली ने मैंने जिन्दगी की हर कह को मान लिया है, उसको मैंने पहचान लिया है..., कमल जोशी ने अधरों पर मुस्कान लिए..., भगवान बंशीवाल ने टूट रही आशाएं..., सुधीर पुरोहित ने मदमस्त हवा का झोंका हूं कुछ खोया..., यशवंत कोठारी ने तेरा मेरा एक धरा है एक माटी का पुतला है..., झील के पानी तू कितना गहरा..., शाबिर शुक्रिया ने या खुदा तेरे करम से ही गुजारा चाहिए, मां मुझे बचा ले मैं भी जीना चाहती हूं..., कालूलाल क