गुसांईजी का 500वां प्राकट्योत्सव
अलौकिक उत्सव जनवरी में
नाथद्वारा.श्रीविट्ठलनाथ गुसांईजीके 500वें प्राकट्योत्सव पर श्रीजी मंदिर में अगले साल अलौकिक उत्सव होंगे। श्रीविट्ठलनाथजी के पंच शताब्दी समारोह की शुरुआत 16 दिसबंर को होगी। श्रीजी मंदिर श्रीकृष्ण भंडार के अधिकारी सुधाकर शास्त्री ने बताया कि मंदिर के तिलकायत राकेश महाराज के निर्देशानुसार गुसांईजी के पंच शताब्दी समारोह उत्सव सालभर मनाने का निर्णय लिया गया है। 16 दिसबंर को सुबह 9 बजे तिलकायत राकेश महाराज गुसांईजी की छवि पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ करेंगे। सर्वोत्तम स्त्रोत पाठ करेंगे। इस दिन राजभोग की झांकी में नवनीतप्रियाजी श्रीजी प्रभु की गोद में बिराजेंगे। तिलकायत राकेश महाराज नवनीतप्रियजी को श्रीजी की गोद में पधराकर तिलक आरती करेंगे।
गुसांईजी का परिचय
श्रीविट्ठलनाथजीका जन्म विक्रम संवत 1572 पौष कृष्ण नवमी को काशी के पास चरणाट गांव में हुआ था। विक्रम संवत 1580 चैत्र शुक्ल नवमी के दिन काशी में इनका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ था। पूज्यपाद श्रीमदवल्लभाचार्य ने किया। संवत 1589 में वागरोदी विश्वनाथ भट्ट की पुत्री रुक्मिणी के साथ इनका विवाह हुआ। 1590 में श्री गुसांईजी अपने भाई गोपीनाथ के साथ गिरिराज पहुंचे बंगालियों को हटवा कर श्रीजी सेवा का प्रबंध अपने हाथ में लिया। विक्रम संवत 1640 में गुसांईजी ने अपने सातों पुत्रों को सातों निधियां बांट दी। सातों निधियों में ही से स्वरूप है जो कि मदवल्लभाचार्य को यात्रा प्रसंग में मिले थे। ये सात निधियां वल्लभ संप्रदाय में सातघर के नाम से प्रसिद्ध है। संगीत में गुसांईजी की अप्रतिहत गति थी, उन्होंने श्याम कुमार को कीर्तनिया नियुक्त किया। संगीत सम्राट तानसेन को श्रीनाथजी के दर्शन करवाए। विक्रम संवत 1644 फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर वे नित्य लीलास्थ में प्रवेश कर गए।
गादीपर बिराजेंगे तिलकायत
राजभोगदर्शन के बाद तिलकायत राकेश महाराज महाप्रभुजी के बैठक स्थित गादी पर बिराजेंगे। तिलकायत गद्दल धारण कर वैष्णवों, सेवकों, ग्वाल बालों को शुभाशीष देंगे। इस दिन शाम को भोग आरती दर्शनों के बाद शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसकी शुरुआत मंदिर के नक्कार खाना गेट से होगी। शोभायात्रा मंदिर मार्ग, चौपाटी, बडा़ बाजार, मंदिर पीछे, नया बाजार होते हुए मंदिर परिक्रमा कर पुन: नक्कार खाना पर पहुंचेंगी।