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श्रीजी प्रभु का पाटोत्सव कल, गुलाल अबीर से फाग खेलाएंगे

6 वर्ष पहले
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श्रीनाथजीमंदिर में फाल्गुन कृष्ण सप्तमी बुधवार को श्रीजी प्रभु का पाटोत्सव मनाया जाएगा। परंपरा के अनुसार पाटोत्सव पर श्रीजी प्रभु के संग श्रीलालन प्यारे को अनूठा शृंगार अंगीकार कराकर राग भोग सेवा के लाड लड़ाए जाएंगे। हवेली के प्रवेश द्वारों पर अशोक पत्र की बंदनवार बांधी जाएगी। देहली मंडित की जाएगी। राजभोग झांकी में बाल स्वरूपों को गुलाल अबीर से सराबोर कर फाग खिलाया जाएगा। पाटोत्सव पर सुबह मंगला झांकी से लेकर सायंकालीन शयन के दर्शन तक झांझ की झंकार पर कीर्तन की रसधार बहेगी। कीर्तनकार राग आसावरी, बसंत, देवगंधार, खट समेत विविध रागों में कीर्तन पदों का गानकर श्रीजी प्रभु को रिझाएंगे।

शुरूहोगी रसिया की धूम

परंपराके अनुरूप पाटोत्सव से श्रीजी प्रभु की हवेली में रसिया की धूम भी शुरू हो जाएगी। यह डोलोत्सव तक जारी रहेगी। ब्रजवासी सेवक ग्वाल बाल डफ की थाप पर रसिया का गान कर श्रीजी प्रभु को रिझाएंगे।

स्वांगरचकर नाचेंगे बाल गोपाल

पाटोत्सवसे श्रीजी प्रभु की हवेली में स्वांग नृत्य की धूम भी प्रारंभ हो जाएगी। नगर के बच्चे प्रतिदिन विविध प्रकार के स्वांग धारण कर शयन के दर्शन में श्रीजी प्रभु के सम्मुख नृत्य करेंगे। राजभोग झांकी के दौरान कीर्तनकार वाद्य यंत्र उपंग द्वारा श्रीजी प्रभु को रिझाएंगे। परंपरा के अनुरूप पाटोत्सव के दिन शाम को खर्च भंडार में श्रीजी प्रभु को केसरयुक्त दूध का भोग अरोगाया जाएगा।

श्रीजीप्रभु का 343 वां पाटोत्सव

श्रीजीप्रभु के ब्रज से नाथद्वारा पधारने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले पाटोत्सव की इस साल 343 वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि विक्रम संवत 1728 फाल्गुन कृष्ण सप्तमी 20 फरवरी सन 1672 ईस्वी को श्रीजी प्रभु नाथद्वारा में पाट पर विराजित हुए थे। इस दिन उदयपुर के राजघराने के राणा राजसिंह ने पूरे मेवाड़ में भारी उत्सव मनाया था।