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हर बात को तुम भूलो भले, मां-बाप को मत भूलना.... पर बटोरी तालियां

5 वर्ष पहले
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नाथद्वारा | शहरकी श्रीनाथ साहित्य संगम की काव्य गोष्ठी गुरुवार को हुई। अध्यक्षता प्रमोद सनाढ्य ने की। मुख्य अतिथि मदन मोहन शर्मा अविचल भंवर चपलोत थे। गोष्ठी का शुभारंभ यशवंत सिंह कोठारी की मैं शब्दों की सरिता बहता रहा हूं..., उछलती लहरों के तराने गाता रहा हूं... से हुआ। गोष्ठी में तुलसीदास सनाढ्य ने एक दिन मेरे आंगन में, एक कली जो खिल जाएगी..., राजेंद्र कुमार सोमानी ने हर बात को तुम भूलो भले, मां-बाप को मत भूलना..., मदन सिंह रावल ने दो गज जमीं में सबकी इम्तहान है..., कोई बचेगा कोई बचा है..., दिलीप शर्मा ने दीवार पर टंगा हुआ कैलेंडर बदल गया..., धर्मचंद मेहता ने वंदे मातरम, वंदे मातरम..., शीलु भाई ने तुम इस तरह से मेरी जिंदगी में..., ललित सनाढ्य ने जरूरी नहीं कि अपनी बात कहने को..., सूर्यप्रकाश दीक्षित ने सब बदल जाए पर वो नहीं बदलती है..., रजनीकांता पुरोहित ने श्याम सखा मेरे मन में बसे है... भंवरलाल चपलोत ने चलो करे स्वागत नूतन वर्ष का..., मदन मोहन शर्मा ने मत प्रतीक्षा करो अच्छे अवसर की..., डॉ. भगवानलाल बंशीवाल ने साहित्य सृजनरत रहना चाहता हूं..., धीरेंद्र शिल्पी ने बुढ़ापा गजरेगा उन्हीं के सहारे..., प्रमोद सनाढ्य ने ना ही भरोसा प्रीत को सुनाया।

, प्रीत बड़ी दुखदायी..., कविता से समां बांध दिया। संचालन रजनीकांता पुरोहित ने किया।

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