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प्राइवेट कंपनी को मालिक बताकर ट्रैवल्स एजेंसी को पहुंचाया था 62.86 लाख रुपए का फायदा

4 वर्ष पहले
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एसीबीकी जांच में सामने आया कि तीनों जिलों के परिवहन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने श्रीनाथ ट्रैवल्स एजेंसी के मालिक को गलत लाभ पहुंचाने के लिए नियमों से परे जाकर बसों के गलत परमिट जारी कर दिए। इन बसों की एग्रीमेंट भी नहीं था। एसीबी ने जब परिवहन विभाग के रिकॉर्ड की जांच की तो भ्रष्टाचार की परतंे खुलती गईं।

एसीबी के एएसपी राजेश चौधरी ने बताया कि अधिकारियों ने बसें हिंदुस्तान जिंक की होना बताकर गड़बड़ी की थी। राजसमंद जिला परिवहन अधिकारी ओमप्रकाश बैरवा के कार्यकाल में 11 वर्तमान जिला परिवहन अधिकारी नैन सिंह सोढ़ा के कार्यकाल में 12 सहित कुल 23 बसों के परमिट राजसमंद कार्यालय से जारी कर 20 लाख 28 हजार 306 रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। इसी प्रकार चित्तौड़गढ़ से 13 बसों का परमिट जारी कर 21 लाख 57 हजार 995 रुपए का नुकसान और भीलवाड़ा शाहपुरा के परिहवन कार्यालय से 14 बसों का परमिट जारी कर 20 लाख 99 हजार 992 इस प्रकार कुल 62 लाख 86 हजार 293 रुपए का सरकार को राजस्व नुकसान हुआ। एसीबी की जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने पर परिवहन विभाग के अधिकारियों ने मामले पर पर्दा डालने के लिए श्रीनाथ ट्रैवल्स एजेंसी के मालिक को नोटिस जारी कर दिया। उससे रिकवरी कर ली गई।

राजसमंदसे सबसे ज्यादा 23 बसों के परमिट जारी हुए : 1सितंबर 16 को जिला परिवहन कार्यालय राजसमंद के तत्कालीन डीटीओ ओमप्रकाश बैरवा ने 11 बसों, 29 नवंबर 16 को 12 बसों का पीएसवी परमिट डीटीओ नैन सिंह सोढ़ा ने जारी किया। सभी वाहनों के रजिस्ट्रेशन जांच में वाहन श्रीनाथ ट्रैवल्स एजेंसी के नाम से रजिस्टर्ड होना सामने आया है। इन पर किसी प्रकार का लीज एग्रीमेंट दर्ज नहीं है।

गलत परमिट जारी करने से सरकार को हुआ था नुकसान

राजसमंदएसीबी ने राजसमंद के जिला परिवहन कार्यालय पर 23 जनवरी को छापा मार कर जांच की थी। इसमें श्रीनाथ ट्रैवल्स एजेंसी की बसों को अनुबंध के आधार पर जारी परमिट में रिकॉर्ड जब्त कर जांच की थी। जांच में सामने आया कि हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के दरीबा माइंस, देबारी माइंस, जावर माइंस, चंदेरिया जिंक स्मेल्टर भीलवाड़ा के आगुचा माइंस में अनुबंध पर लगी श्रीनाथ ट्रैवल्स एजेंसी नाथद्वारा की 50 बसों को कांट्रेक्ट कैरिज परमिट की जगह प्राइवेट सर्विस व्हीकल परमिट जारी कर रखा है। इसमें परिवहन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ट्रैवल्स एजेंसी के मालिक ने मिलीभगत सामने आई थी। बाद में सभी परमिट निरस्त भी कर दिए थे। बसों को जिंक के कर्मचारियों को प्लांट पर लाने-ले जाने पर लगा रखा था।

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