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‘शुद्ध मन से प्रभु स्मरण से मिटते हैं दुख’

6 वर्ष पहले
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नावां। शहर में मंगलवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शिवरात्रि महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उपखंड अधिकारी परसराम मीणा ने कहा कि महान आत्मा बनने के लिए आत्मिक शक्तियों को पहचानने की अति आवश्यकता है।
जितना आत्मिक स्थिति का अभ्यास होगा उतनी ही बुद्धि की स्थिरता बढ़ेगी और बुद्धि शुद्ध होती जाएगी। सतोप्रधान बुद्धि, भौतिक और आणविक शक्तियों का प्रयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए करेगी। मनीष व्यास ने कहा कि इस परिवर्तनकारी समय में पुरुषोत्तम संगम युग पर ज्ञान सागर, पतित पावन, सर्वशक्तिमान, परमपिता परमात्मा शिव से संबंध जोड़ने से ही मनोबल बढ़ सकता है।
आज वही परमात्मा शिव संगम युग पर अपने भक्तों को शां‍ति सुख पवित्रता का वरदान दे रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि दुख के समय में हर कोई प्रभु का सिमरन करता है लेकिन सुख के समय में कोई नहीं। अपने मन को शुद्ध कर प्रभु का चिंतन करने से ही दुखों से निजात मिलती है। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी चंद्रकला बहन ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा अति प्रिय ज्योतिस्वरूप है। उनका कोई भी स्थूल आकार नहीं है।
वे इस सांसारिक जन्म-मरण के चक्र से न्यारे हैं। वे सर्व आत्माओं के माता-पिता, बंधु, सखा तथा सत्य ज्ञान देने वाले सदगुरु हैं। वे हमारे आध्यात्मिक मार्गदर्शक और शिक्षक भी हैं। इससे पूर्व समारोह का शुभारंभ एसडीएम मीणा ने ध्वजारोहण करके किया। इस अवसर पर बाबूलाल दुबलदिया, सीताराम प्रजापत, कुंजबिहारी गोयल, बाबूलाल, अनुसूइया दीदी सहित अनेक लोग मौजूद थे।

नावां सिटी. शिवरात्रिमहोत्सव समारोह में उपस्थित लोग।
नावां सिटी. शिवरात्रिमहोत्सव समारोह में संबोधित करते अतिथि