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एसोसिएशनों में दो फाड़

7 वर्ष पहले
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>एक ने छीजत में कटौती का फैसला लिया तो दूसरी ने किया इनकार

नावांसिटी| नावांमें चल रहे नमक उत्पादन के व्यापार में नमक उत्पादकों नमक प्लांटों रिफाइनरियों के मालिकों में तालमेल बनता नहीं दिख रहा। एक ओर नमक उत्पादक बैठक कर नमक उत्पादक संघ की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए एक जुट हो रहे हैं दूसरी तरफ एक फैसले पर दोनों एसोसिएशन दो फाड़ हो रही हैं।

नमक उत्पादन संघ ने नमक बेचान पर बिल में दो प्रतिशत कटौती के स्थान पर एक प्रतिशत कटौती करने नमक का परिवहन करने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली डंपर से शुल्क वसूलने का निर्णय लिया। दूसरी ओर नमक प्लांटों रिफाइनरियों के मालिकों ने इस निर्णय को मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय सर्वसम्मति से नहीं लिया गया। इसके कारण वे राजस्थान नमक उत्पादक संघ के निर्णय को नहीं मानेंगे। इससे दोनों एसोसिएशनों में ठनती नजर रही है। मामले के अनुसार 9 दिसंबर को ग्राम जाबदीनगर में राजस्थान नमक उत्पादक संघ की बैठक में निर्णय लिया गया था कि 16 दिसंबर से नमक के बेचान पर बिल में दो प्रतिशत कटौती के स्थान पर एक प्रतिशत कटौती की जाएगी। साथ ही नमक उत्पादक द्वारा भेजे गए नमक की प्रत्येक ट्रैक्टर ट्रॉली पर दस रुपए डंपर पर तीस रुपए के हिसाब से उत्पादक के बिल से काटकर महीने के प्रथम सप्ताह में संघ के प्रतिनिधियों को भुगतान देकर रसीद प्राप्त करेंगे।

हमनहीं मान सकते यह फैसला

राजस्थानआयोडाइज्ड साल्ट मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के सचिव अजय अग्रवाल ने शुक्रवार को बताया कि नमक उत्पादक संघ द्वारा पूरी सहमति के बिना बेचान पर बिल में दो प्रतिशत की कटौती जो पिछले कई सालों से नमक के गीला होने के कारण चल रही है, इसे बंद करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से समस्त आयोडाइज्ड एवं रिफाइंड नमक उत्पादक, रिफाइनरी, वाशरी प्लांटों के मालिक असहमत हैं। नमक उत्पादक संघ का दो प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कटौती का फैसला दस रुपए प्रति ट्रैक्टर तथा तीस रुपए प्रति डंपर के हिसाब से भुगतान करने के निर्णय को अस्वीकार करते हैं।