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परिणाम के पीछे की पूरी कहानी

6 वर्ष पहले
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कांग्रेस ने 5 साल पहले की हार का लिया बदला

1. कांग्रेस के प्रमुख चेहरे

माहौलबनाना सीटें हथियाना : भाजपाके पास 25 सदस्य थे और कांग्रेस के पास 22 सदस्य थे। कांग्रेस के नेताओं ने शनिवार सुबह भाजपा की बिंदु चौधरी को टिकट मिलने के बाद से ही माहौल बनाना शुरू कर दिया था। कांग्रेस की पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा, पूर्व विधायक महेंद्र चौधरी, रिछपाल मिर्धा आदि ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

2.ऐनवक्त पर बदला फैसला

भाजपाकी सुरक्षित सीट पर ऐसे हुआ कब्जा : कांग्रेसके पास 22 सीट तो थी, मगर कांग्रेस में भी दो धड़े थे। एक धड़ा सुनीता चौधरी के ग्रुप के साथ जाने की बजाय कुछ और निर्णय लेने में जुटा था। मगर शनिवार सुबह जैसे ही बिंदु चौधरी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया, यह धड़ा सुनीता चौधरी के साथ हो गया।

3.डेमेज कंट्रोल

कांग्रेसको भी खतरा था कि उनके 22 में से कुछ सदस्य भाजपा के खेमे में जा सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने डेमेज कंट्रोल के तहत अपना निर्णय बदला।

4.एक दावेदारी से खत्म हो गया अंसतोष

कांग्रेसमें पहले दो मजबूत दावेदार जिला प्रमुख के लिए थे। इनमें नावां के पूर्व विधायक महेंद्र चौधरी की प|ी सुनीता चौधरी दूसरे पाली के पूर्व सांसद बद्री जाखड़ की बेटी विनीता फिड़ौदा थी। मगर विनीता के जिला परिषद चुनाव में हारने से कांग्रेस के पास सुनीता के अलावा कोई मजबूत दावेदार नहीं बचा था।

5.यह रही मुख्य वजह

2010में कांग्रेस से ज्योति मिर्धा सांसद थी। उन्होंने अपने चाचा पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा को जिला प्रमुख का चुनाव लड़वाया था। तब कांग्रेस के पास 28 भाजपा के पास 18 सदस्य थे। मगर उलटफेर हुआ। रिछपाल मिर्धा को 21 वोट ही मिले और बिंदु चौधरी 25 वोट लेकर जिला प्रमुख बन गई थी। तभी से ज्योति मिर्धा रिछपाल मिर्धा को पांच साल से यह बात खाए जा रही थी कि वे बहुमत होते हुए भी हार गए। उनका सीधा टारगेट बिंदु चौधरी को हराना था।

कामयाबीका सेहरा | एकजुट हुई टीम पर

डॉ. ज्योति मिर्धा : इनकासीधा टारगेट बिंदु चौधरी को जिला प्रमुख बनने से रोकना था। इसके लिए योजना पहले से बन चुकी थी। रिछपाल मिर्धा, हरेंद्र मिर्धा, जाकिर गैसावत, चेतन डूडी, महेंद्र चौधरी एक मंच पर चुके थे। इसमें ज्योति मिर्धा ने भूमिका निभाई।

रिछपालमिर्धा : इनकोपांच साल पुरानी पीड़ा थी जब बहुमत होते हुए भी 2010 में जिला प्रमुख का चुनाव हारे थे। बिंदु चौधरी के भाई अजय किलक इनको दो बार विधायक का चुनाव हरा चुके थे। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में रिछपाल खुद का वजूद कायम करने के लगातार प्रयास में थे। इस बार टीम वर्क से सफल हो गए।

महेंद्रचौधरी : कांग्रेससत्ता में नहीं और खुद भी विधायक नहीं। राजनीतिक हाशिए से लौटने के लिए इन्होंने प्रयास किए। गहलोत ग्रुप से हैं मगर इसके बावजूद सचिन पायलट ग्रुप से जुड़े। नागौर में एकजुट हुई कांग्रेस में यह भी शामिल हुए। कांग्रेस में इनकी प|ी के अलावा कोई दूसरा मजबूत प्रत्याशी जीतकर नहीं आया था। उसके बाद प्रयास में जुट गए।

डॉ.जितेंद्र सिंह : पूर्वमंत्री नागौर में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी। कांग्रेस की लड़ाई की नब्ज इन्हें पता थी। लड़ाई कैसे मिटाई जा सकती है यह भी इन्हें मालूम था।

डेगाना. डेगानापंचायत समिति में प्रधान चुनाव के दौरान शनिवार को कांग्रेस के कुछ नेताओं के पंचायत समिति सदस्यों के साथ अंदर प्रवेश करने की बात को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक रिछपालसिंह मिर्धा सहकारिता मंत्री अजय किलक में जोरदार विवाद हो गया। दोनों एक दूसरे के सामने हुए तो एक दूसरे के खिलाफ जमकर बोला। सहकारिता मंत्री अजयसिंह किलक कांग्रेस नेता रिछपालसिंह मिर्धा के बीच बहस हुई। इसी बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ पुलिस की सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए अंदर घुस गई। सीआई नदंराम भादू सहित थानाधिकारियों पुलिस जाप्ते ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं खदेड़ा। शेषपेज 13 पर

डेगाना. अजयसिंह किलक रिछपालसिंह मिर्धा के बीच बहस हुई।

स्थान प्रधान पार्टी सीट मत

नागौर ओमप्रकाश निर्दलीय 35 15

कुचामन कैलाश भाजपा 27 16

मकराना हिम्मतसिंह कांग्रेस 25 13

डीडवाना गुलाराम कांग्रेस 27 19

परबतसर रतनी कांग्रेस 21 12

खींवसर पूनाराम भाजपा 31 निर्विरोध

मौलासर जालाराम कांग्रेस 23 17

मेड़ता किरण भाजपा 33 27

मूंडवा राजेंद्र कांग्रेस 25 15

डेगाना दुर्गा भाजपा 23 12

जायल सुनिता कांग्रेस 33 21

लाडनूं पुष्पा कंवर निर्दलीय 19 13

रियां मीता बग्गड़ भाजपा 27 22

नावां प्रियंका कांग्रेस 21 13

14 समितियों में ये बने प्रधान