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सियासत में अटक गया प्रतिमा का अनावरण

7 वर्ष पहले
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भलेही गुलामी की जंजीरों से आजाद होने के बाद भारत र| डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश के नागरिकों को स्वच्छंद रहने का अधिकार दिलाने के लिए देश का संविधान लिखा हो लेकिन पिछले दो दशक से संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा अनावरण का मामला सियासती पर्दों में लिपट कर रह गया है। शहर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति की स्थापना के लिए सभी दलित संगठनों ने लंबा संघर्ष किया तब जाकर प्रतिमा लगाने का रास्ता साफ हुआ। सभी संगठनों ने एकजुट होकर डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति स्थापना एवं निर्माण समिति का गठन किया। समिति ने हर स्तर पर प्रयास करके 15 महीनों पहले कनोई पार्क में आदमकद मूर्ति की स्थापना करवा दी। इस मूर्ति की स्थापना के बाद से यह सफेद चादर में लिपटी हुई है। दलित प्रमुख संगठनों का मानना है कि प्रतिमा को इस तरह चादर में लपेटकर रखने से लोगों की भावनाओं और डॉ. अंबेडकर का भी अपमान किया जा रहा है।

शेषपेज| 15 पर

सीएम से जल्द कराएंगे अनावरण

^अनावरणको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल मिला था। मैंने सांसद सीआर चौधरी और मुख्यमंत्री को अवगत कराया है। निकाय और पंचायत चुनावों के चलते मुख्यमंत्री समय नहीं दे पा रही हैं। जल्द ही मुख्यमंत्री के हाथों मूर्ति का अनावरण कराने का प्रयास किया जाएगा। -विजयसिंहचौधरी, विधायक,नावां

सीएम से समय लेंगे

^अनावरणसमारोह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से कराने के लिए समिति सदस्य मुझसे मिले थे। इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री को एक प्रस्ताव बनाकर भी भेजा था लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर समय लिया जाएगा। -हरीशकुमावत, पूर्वविधायक एवं पालिकाउपाध्यक्ष, कुचामन

कनोई पार्क में सफेद चादर में लिपटी डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा।

15 लाख की है अष्टधातु की प्रतिमा

संविधाननिर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को स्थापित करने में करीब 15 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर मूर्ति स्थापना एवं निर्माण समिति के अध्यक्ष हेमराज चावला बताते हैं कि जोधपुर के बाद बाबा साहेब की यह दूसरी ऐसी मूर्ति है जो अष्टधातु से बनी है। मूर्ति एवं प्रतिमा स्थल की बनावट में दलित समाज के दानदाताओं के सहयोग से 15 लाख रुपए अब तक खर्च किए जा चुके हैं।