सीधाटारगेट बिंदु
रिछपाल मिर्धा
बिंदुचौधरी के भाई अजय किलक इनको दो बार विधायक का चुनाव हरा चुके थे। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में रिछपाल खुद का वजूद कायम करने के लगातार प्रयास में थे। इस बार टीम वर्क से सफल हो गए।
सीधाटारगेट बिंदु चौधरी को जिला प्रमुख बनने से रोकना था। रिछपाल मिर्धा, हरेंद्र मिर्धा, जाकिर गैसावत, चेतन डूडी, महेंद्र चौधरी एक मंच पर चुके थे। इसमें ज्योति मिर्धा ने भूमिका निभाई।
टिकट का असंतोष खत्म किया
टीम वर्क पर
कामयाबी का सेहरा
^हमने तो वहीं परंपरा निभाई जो यहां 5 साल पहले भाजपा ने शुरू की थी। 5 साल पहले तोड़फोड़ की जो राजनीति शुरू की थी वह कैसी होती है यह अब भाजपा को पता चल गया होगा। ज्योतिमिर्धा, पूर्व सांसद
टिकट के साथ ही बदले समीकरण
कांग्रेस ने ले लिया पुराना बदला
एक दावेदारी से खत्म हो गया
माहौल बनाना सीटें हथियाना
कांग्रेस के पास 22 सीट तो थी, मगर कांग्रेस में भी दो धड़े थे। एक धड़ा सुनीता चौधरी के ग्रुप के साथ जाने की बजाय कुछ और निर्णय लेने में जुटा था। मगर शनिवार सुबह जैसे ही बिंदु चौधरी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया, यह धड़ा सुनीता चौधरी के साथ हो गया। कांग्रेस का एक धड़ा भी बिंदु चौधरी काे पसंद नहीं करता था।
...और ये रही वजह
भाजपा के पास 25 सदस्य थे और कांग्रेस के पास 22 सदस्य थे। कांग्रेस के नेताओं ने शनिवार सुबह भाजपा की बिंदु चौधरी को टिकट मिलने के बाद से ही माहौल बनाना शुरू कर दिया था। कांग्रेस की पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा, पूर्व विधायक महेंद्र चौधरी, रिछपाल मिर्धा आदि ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
मुख्य वजह यही रही 2010 में कांग्रेस से ज्योति मिर्धा सांसद थी। उन्होंने अपने चाचा पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा को जिला प्रमुख का चुनाव लड़वाया था। रिछपाल मिर्धा को 21 वोट ही मिले और बिंदु चौधरी 25 वोट लेकर जिला प्रमुख बन गई थी। तभी से ज्योति मिर्धा रिछपाल मिर्धा को पांच साल से यह बात खाए जा रही थी कि वे बहुमत होते हुए भी हार गए।
अंसतोष कांग्रेस में पहले दो मजबूत दावेदार जिला प्रमुख के लिए थे। इनमें नावां के पूर्व विधायक महेंद्र चौधरी की प|ी सुनीता चौधरी दूसरे पाली के पूर्व सांसद बद्री जाखड़ की बेटी विनीता फिड़ौदा थी। मगर विनीता के जिला परिषद चुनाव में हारने से कांग्रेस के पास सुनीता के अलावा कोई मजबूत दावेदार नहीं बचा था।
कांग्रेस का गेम प्लान
कांग्रेस ने तैयारी ही जीतने वाली की थी
डेमेज कंट्रोल
कांग्रेस को भी खतरा था कि उनके 22 में से कुछ सदस्य भाजपा के खेमे में जा सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने डेमेज कंट्रोल के तहत अपना निर्णय बदला। ज्योति मिर्धा और रिछपाल मिर्धा ने कांग्रेस के सभी सदस्यों से बात की। उन्हें भरोसा दिलाया गया। आखिर विश्वास काम आया।
पैंतरा बदला
ऐन वक्त तक चेंज
बड़े चेहरे