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नकली पुलिस वालों में शामिल था रेनवाल थाने का असली सिपाही

7 वर्ष पहले
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परसरामपुरिया गेस्ट हाउस के मालिक का अपहरण करने की साजिश में नकली पुलिस रेनवाल थाने का असली सिपाही शामिल था। वारदात के वक्त बगरू थाने का एक हिस्ट्रीशीटर पुलिस को चकमा देकर भाग गया। लेकिन रेनवाल थाने का सिपाही पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आरोपियों से पुलिस की पूछताछ में यह खुलासा हुआ।

सीआई अरविंद चारण ने बताया कि परसरामपुरिया गेस्ट हाउस के मालिक बनवारीलाल ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व इसी गेस्ट हाउस से पीतल की 65 ईंटें निकलवाई थी। इनमें प्रत्येक का वजन करीब 960 ग्राम है। इनको साेने में बदलने के लालच में बनवारीलाल मध्यप्रदेश के तांत्रिक जमील कुरैशी के झांसे में गया।

इधर, तांत्रिक ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर बनवारीलाल के अपहरण का पूरा प्लान बना लिया था, जिसे बाद में नवलगढ़ पुलिस ने नाकाम कर दिया। अपहरण करने के प्रयास में पुलिस द्वारा पकड़े गए दो तांत्रिकों नकली पुलिस के रूप में चार अन्य लोंगों में एक अखेसिंह मीणा रेनवाल थाने में हकीकत में सिपाही के रूप में तैनात है। वह भी सोने के लालच में आकर तांत्रिक गिरोह के साथ मिल गया। इन लाेगों में तय हुआ था कि पीतल की ईंटों में जितना भी अंश सोने का निकलेगा, सभी बराबर बांट लेंगे। सेठ ने भी ईंट को सोने की बनने पर आधा-आधा ईंट बांटने का प्लान बनाया था।

सभी आरोपी फुलेरा सांभर इलाके में काम करते थे। इसलिए आपस में एक-दूसरे से परिचित थे। एक आरोपी गुलाब अपने किसी परिचित से यह कहकर गाड़ी लाया था कि वह अपने किसी रिश्तेदार से मिलने जा रहा है।