तरक्की की राह पर हवेलियों का शहर नवलगढ़
नवलगढ़ तब
नवलगढ़ अब
हवेलियोंका शहर 278 वर्ष का हो गया है। इस लंबे सफर के दौरान तरक्की की कई सीढ़ियों पर चढ़ा। विकास से शहर का दायरा बढ़ा और शिक्षा ने लोगों की सोच बदली। लेकिन तरक्की की राह पर दौड़ते शहर के लोगों को अपनी विरासत को बचाने का संकल्प लेना होगा। आज ही के दिन ठाकुर नवलसिंह ने सन् 1737 में अपने पिता झुंझुनूं के शासक ठाकुर शार्दुलसिंह के जीवित रहते रोहिली गांव की तलाई किनारे अपने गढ़ की नींव रखी, जो आज भी सब्जी मंडी में बाला किला के रूप में जाना जाता है। उन्होंने शेखावतों के आराध्य देव गोपीनाथजी के मन्दिर का निर्माण भी शुरू करवाया, जिसका काम 1755 में पूरा हुआ। इतिहासकारों के अनुसार ठा. नवलसिंह ने महज 21 साल की उम्र में नवलगढ़ की स्थापना कार्य शुरू कर दिया था।
उन्होंने फतेहगढ़ या कचियागढ़ के रूप में तोपों से सज्जित एक सुरक्षा चौकी का निर्माण किया जिसके अवशेष आज भी चुणा चौक में स्थित है। ठाकुर नवल सिंह बहादुर ने कस्बे के चारों तरफ परकोटे का निर्माण करवाया, जो नानसा गेट, पोदार गेट, बावड़ी गेट मंडी गेट के नाम से जाने जाते हैं। इसके चारों ओर लोहार्गल के नालों से पूरित नहर भी थी जो अब दिखाई नहीं देती। इसी के पास सैयद जाति के लोगों को बसाया गया जिन्हे गोलमदार भी कहते थे, ये लोग तोपें संभालते चलाते थे।
प्राचीन रामदेव मंदिर
> नगरपालिका का भव्य नया भवन
> साइंस पार्क की स्थापना
> बाबा रामदेव मंदिर का नवनिर्माण
> सरकारी कॉलेज की स्थापना
> सैटेलाइट अस्पताल (निर्माणाधीन)
> पुलिस थाने से स्टेशन तक सीसी सड़क (मय डिवाइडर)
> रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण
> ब्रॉडगेज से जुड़ा नवलगढ़
> रोडवेज स्टैंड का निर्माण
> फल सब्जी मंडी (निर्माणाधीन)
> हाइमास्क लाइटें, जिनसे शहर रोशन
विकास की अंधी तोड़ के चलते कस्बे में हवेलयों को तोड़कर काॅम्पलेक्स बनने लगे हैं। जो कि कस्बे के लिए चिंता का विषय है। इस विरासत को बचाने के लिए सभी को एकजुटता दिखानी होगी। सभी लोग अगर मिलकर संकल्प करें तो कस्बे को पर्यटन सिटी के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां पर रोजगार के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं हुए हैं, अगर युवाओं के लिए रोजगार के लिए कुछ प्रयास शुरू होतो, यहां के युवाओं का यहां पर ठहराव हो सकता है। ट्रेफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास शुरू करने होंगे।
टेढ़े मेढ़े रास्ते पुराने समय में थे सुरक्षा के उपाय
शहरकी बिगड़ी ट्रेफिक व्यवस्था के लिए संकरी गलियों और टेढ़े -मेढ़े रास्तों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन इतिहास में रूची रखने वाले विजयदीपसिंह शेखावत ने बताया कि यह पुराने समय में यह सुरक्षा का उपाय था, ताकि कोई सेना गढ़ पर एक साथ हमला नहीं कर सके। घुड़सवार इन संकरी गलियों टेढ़े - मेढ़े रास्तों में ही अटक कर रह जाए हमलावरों को गढ़ तक पहुंचने से पहले मार दिया जाए।
यहां की हवेलियों में बनी सुंदर फ्रेस्को पेंटिंग्स दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इसी के चलते शेखावाटी अंचल को राजस्थान की ओपन आर्ट गैलरी भी कहा जाता है। यहां की हवेलियों के कारण कस्बे को हेरिटेज सिटी भी कहा जाता है। 1830 से 1930 के दौरान यहां के व्यापारियों ने अपनी सफलता और समृद्धि को प्रमाणित करने के लिए सुंदर एवं आकर्षक चित्रों से युक्त हवेलियों का निर्माण कराया। उस समय के कलाकारों की जितनी कल्पना थी, उस कल्पना को चित्रों के जरिए उकेर दिया। भगतों की हवेली, परसरामपुरिया हवेली, छावछरिया हवेली, सेकसरिया हवेली, मोरारका हवेली एवं पोदार हवेली आज भी शानों- शौकत की प्रतीक हैं। समय के साथ-साथ आज इन हवेलियों ने विरासत का रूप धारण कर लिया।
हवेलियों का शहर नवलगढ़
नवलगढ़। सबसे पहली नगरपालिका, जो मंडी गेट पर स्थित थी।