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इधर, पांच मिनट में होगी स्वाइन फ्लू की जांच

6 वर्ष पहले
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जिले में स्वाइन फ्लू के 18 संदिग्ध रोगी मिले

जिले में स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। शुक्रवार को 18 स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगी मिले। इनमें 15 नीमकाथाना और तीन एसके अस्पताल में आए। एसके अस्पताल से एक को जयपुर रैफर किया है। दो महिलाओं का यहीं उपचार चल रहा है। आइसोलेशन वार्ड में करीब डेढ़ दर्जन मरीजों को एहतियात के तौर पर टेमीफ्लू दवा दी गई है।

नीमकाथाना में मिले 15 संदिग्ध मरीजों में से चार को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया, वहीं दो को रैफर कर दिया। अस्पताल से रैफर एवं भर्ती किए गए किसी भी मरीज की जांच रिपोर्ट नहीं आने से स्वाइन फ्लू रोगियों की पहचान नहीं हो पा रही है। जयपुर में सिरोही के कैरोड़ा गांव निवासी गर्भवती महिला की मौत के बाद लोगों में दहशत है। शनिवार को भी इस गांव के दो मरीजों को कपिल अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉ.जीएस तंवर ने बताया कि मानसिंह (10) पुत्र रामसिंह एवं श्योनारायण (65) पुत्र बीरबल जैतपुरा को रैफर किया गया। कैरोड़ा निवासी सुरेश पुत्र विक्रमसिंह गुर्जर एवं कमला प|ी किशनलाल गुर्जर, छावनी वार्ड 16 निवासी जुगलकिशोर सैनी पुत्र मूंगाराम सैनी, हीरानगर निवासी गीता प|ी महेंद्रसिंह, विकास पुत्र हनुमान प्रसाद गांवली को भर्ती किया गया है। नीमकाथाना में स्वाइन फ्लू संदिग्धों की संख्या अब तक 52 हो गई है।

सीकर | एसकेअस्पताल में मास्क लगाकर जांच के लिए पहुंचे।

जयपुर. जयपुरके बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेज में रिसर्च निदेशक और जापान की जाइस्ट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ.मनीष बियानी ने ऐसी स्ट्रीप तैयार करने का दावा किया है जो सिर्फ पांच मिनट में स्वाइन फ्लू के वायरस की जांच कर पाएगा। डॉ.बियानी ने बताया-यह डिवाइस जापान में छह माह पहले लॉन्च किया जा चुका है। अब राजस्थान में बायो सॉल्यूशन प्राइवेट लि. कंपनी से करार के बाद यह किट देश में उपलब्ध हो सकेगा।

फायदा

जल्दनतीजे : यहकिट सिर्फ पांच मिनट में जांच के नतीजे दे सकता है। अभी इस्तेमाल किट से रिपोर्ट आने में करीब 24 घंटे लग जाते हैं। यानी संक्रमण फैलने को ज्यादा डर।

सस्ता: कीमत500 रुपए से भी कम होगी। अभी इस्तेमाल में रहे स्वाइन फ्लू टेस्ट किट की कीमत चार हजार रुपए पड़ती है। निजी अस्पतालों में इसकी कीमत करीब 5500 रुपए तक आती है।

आसानइस्तेमाल : किटको आम शख्स भी आसानी से इस्तेमाल कर सकता है।



लैब या अस्पताल जाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

जांच इस तरह

थूक का सैंपल सॉल्यूशन वाली ट्यूब में डाला जाता है। उसी ट्यूब में से तीन बूंदें पेपर इम्यूनो क्रोमेटोग्राफी में डालकर नतीजों का इंतजार करते है।