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पेट के कीड़े खत्म करने वाली दवा पीने से शेखावाटी में 200 बच्चे बीमार

5 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | सीकर/चूरू/झुंझुनूं

डीवार्मिंग डे पर बुधवार को प्रदेशभर में बच्चों को अलबेंडा जॉल (पेट के कीड़े मारने की दवा) पिलाई गई। दवा पीने से शेखावाटी में करीब 200 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इससे स्कूलों अन्य संस्थानों में अफरा तफरी मच गई। बच्चों को अस्पताल ले जाया गया और इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। परिजनों ने भी इसको लेकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि बच्चों को भूखे पेट दवा दे दी गई। सीकर के पलथाना में 40, झुंझुनूं में 75 रतनगढ़-तारानगर में 41 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। इसके अलावा भी कई बच्चे बीमार हो गए। चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि इस दवाई के कुछ साइड इफेक्ट आते हैं। पिछले साल भी दवा से कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी।

पलथाना की नारायण शिक्षण संस्थान में खुराक पिलाने के बाद 40 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। एक साथ इतने बच्चों की तबीयत बिगड़ने से स्कूल संचालक परिजन भी सकते में गए। सभी बच्चों को एंबुलेंस से एसके अस्पताल लाया गया। यहां इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। इसके अलावा खाटू में भी पांच बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी। नीमकाथाना, दांतारामगढ़, सहित कई जगह बच्चों की तबीयत बिगड़ी। मामले में आरसीएचओ डॉ निर्मल सिंह का कहना है कि दवा से कई बार हल्का पेट दर्द उल्टी होने जैसे साइड इफेक्ट आते हैं लेकिन यह गंभीर नहीं होते हैं।

अजमेर में छह और हिंडौन में पांच को भर्ती कराया

अजमेरके निजी स्कूल में छह बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया।उदयपुर में भी दवा खाने के बाद जी मिचलाने की शिकायत के बाद चार बच्चों को अस्पताल भेजा गया। हिंडौन में पांच बच्चों की हालत बिगड़ी।

कईराज्यों में ऐसे हालात

{बिहारमें दवा खाने के बाद 180 बच्चे बीमार। जमुई, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारन में सामने आए मामले।

{हरियाणा में 16 बच्चे अस्पताल में भर्ती। सोनीपत की हिंदू विद्यापीठ में दवा खाने के बाद बच्चे बीमार।

{आगरा के फतेहाबाद प्राथमिक स्कूल में 11 बच्चे बीमार, अस्पताल में भर्ती कराए गए।

बच्चों की तबीयत बिगड़ने से नाराज परिजनों ने भी कई जगह स्कूलों के अध्यापकों चिकित्सकों को खरी खोटी सुनाई। अभिभावकों का आरोप था कि उन्होंने बच्चों को दवाई पिलाने से मना किया था इसके बाद भी उन्हें दवाई पिला दी गई।

दवा पिलाने से मना किया था : परिजन

नेशनल डी वर्मिंग डे अपनी तरह का दुनिया में सबसे बड़ा अभियान है। लक्ष्य के तहत देश में एक ही दिन 27 करोड़ बच्चों को दवा खिलानी थी। लेकिन किसी को आेवरडोज तो किसी को खाली पेट दवा देने की लापरवाही रही। प्रदेश भर में दो करोड़ 51 लाख 52 हजार 569 बच्चों यह दवाई पिलाने का लक्ष्य रखा गया था।

सबसे बड़ा अभियान; फिर भी लापरवाही

सीकर. एसके अस्पताल मंे एकसाथ इतने बीमार बच्चे आने से एकबारगी अफरा-तफरी की स्थिति हो गई।

चूरू : रतनगढ़तारानगर में भी 41 बच्चे दवा पीने से बीमार

रतनगढ़तारानगर में भी 41 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। रतनगढ़ के एक सरकारी स्कूल में 16 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। यहां राजकीय संचियालाल बैद बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में 149 छात्राओं को दवा पिलाई गई थी। छात्राओं की तबीयत खराब होने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिस के अधिकारियों ने स्कूल प्रशासन शिक्षा विभाग के अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। स्कूल प्रशासन ने बताया कि शेष बची 250 टेबलेट पुलिस को सौंप दी गई। तारानगर के स्कूल में भी 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि इलाज के बाद बच्चे सामान्य हो गए।

झुंझुनूं : 75बच्चों की तबीयत बिगड़ी, इनमें 57 चिड़ावा के

झुंझुनूंजिले में भी 75 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, इनमें 57 चिड़ावा के थे। टेबलेट निगलने के कुछ मिनट बाद ही बच्चे जी मिचलाने, चक्कर आने, पेट दर्द और उल्टी की शिकायत करने लगे। घबराए शिक्षक 108 एंबुलेंस निजी वाहनों से बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे। टेबलेट लेने से महर्षि दयानंद माध्यमिक विद्यालय अडूका के 40 और चिड़ावा के वार्ड 11 में संचालित आंबेडकर पब्लिक स्कूल के 8 बच्चे सीएचसी में भर्ती हुए। यहां थानाधिकारी राजेश वर्मा पुलिस टीम अस्पताल पहुंच गई। इसके अलावा जिले के नुआं, नवलगढ़ के सोटवारा, खेतड़ी चिड़ावा के सुल्ताना मंड्रेला में औसतन 2-3 बच्चों की तबीयत बिगड़ी।

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