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दयानंद ने शूद्र को सम्मान से जीने का अधिकार दिलाया
आर्य समाज निम्बाहेड़ा द्वारा आचार्य कर्मवीर मेघार्थी के नेतृत्व में क्षेत्र के गांवों में वैदिक सत्संग एवं भजनोपदेश की शृंखला में मरजीवी में दो दिवसीय कार्यक्रम हुए।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ के भजनोपदेशक पं. उपेंद्र आर्य ने कहा कि 150 वर्ष पूर्व तक समाज मे नारी को नीचा समझा जाता था एवं शूद्र भेदभाव के जीवन से बहुत व्यथित थे। ऐसे में दयानंद ने स्त्री शूद्र को सम्मान से जीने का अधिकार दिलाया। विधवाओं को सम्मानित जीवन जीने के लिए विधवा पुनर्विवाह शुरू कराया। साथ ही बाल-विवाह सती-प्रथा को बंद कराया। कार्यक्रम को आचार्य सानंद ने भी संबोधित किया।
मरजीवी के मानसिंह आंजना ने बताया कि इस अवसर पर आर्य समाज निम्बाहेड़ा के प्रधान विक्रम आंजना, उमराव सिंह भाटी, विशाल साबू, ब्रह्मानंद सोनी, राधेश्याम धाकड़, शिवलाल आंजना, ईश्वरलाल नायक, नारायणसिंह, गणपतलाल आर्य, कालूराम गायरी, गणपत पटेल, कारूलाल आंजना मौजूद थे। संचालन आचार्य कर्मवीर आभार प्रदर्शन कमल आर्य ने किया।
निम्बाहेड़ा. शनिवारको वैदिक सत्संग भजनोपदेश कार्यक्रम में प्रस्तति देते हुए पंडित उपेंद्र आर्य।