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करीब 700 वर्ष पुराना है कंकाली माता का मंदिर
करीब 700 वर्ष पुराना है कंकाली माता का मंदिर
निवाई . शहरके रक्तांचल पर्वत की तलहटी में अति प्राचीन कंकाली माता मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है। मंदिर की स्थापना करीब 700 वर्ष से पहले जयपुर दरबार ने करवाई थी। बताया जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब की सेना ने 1506 ईस्वी में माता के मंदिर पर आक्रमण किया था। सेना के आक्रमण करने के दौरान ही मंदिर परिसर के पेड़ों पर लगी बड़ी मधुमक्खियों के छत्तों से मधुमक्खियों ने सेना पर आक्रमण कर दिया। मधुमक्खियों के आक्रमण से त्रस्त सैनिक चीखते -चिल्लाते दौड़ते हुए करीब 3 किलोमीटर दूर जाकर रुके और चैन की सांस ली। तभी से इस स्थान का नाम चैनपुरा पड़ा, जो आज भी एक गांव के रूप में विकसित है। मंदिर परिसर में मुगलकाल के शासक औरंगजेब की ओर से लिखा गया शिलालेख लगा हुआ है। इसमें मंदिर की महिमा का गुणगान किया गया है तथा मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाने की हिदायत भी दी गई है। पिछले वर्षों में माता के मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया है और वर्तमान में निर्माण जारी है। माता के मंदिर में शतचंडी, सहस्त्र चंडी महायज्ञ भी हो चुके हैं। प्रतिवर्ष चैत्र शारदीय नवरात्र में मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। नवरात्र के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है और श्रद्धालु मत्था टेककर माता का आशीर्वाद लेते हैं। माता का गुणगान चमत्कार देखकर जयपुर, टोंक सहित अनेक स्थानों से दरबार में पदयात्राएं आती हैं। बताया जाता है कि माता के दरबार में जो भी श्रद्धालु मत्था टेककर मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है और कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। माता के मंदिर की व्यवस्थाओं विकास का जिम्मा श्री शक्तिपीठ परिवार ने संभाल रखा है।