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नारियल के दर्शन मात्र से दुखों से मिलता है छुटकारा
नारियल के दर्शन मात्र से दुखों से मिलता है छुटकारा
निवाई . रक्तांचलपर्वत की तलहटी में ज्वालामुखी माता धाम पर यूं तो वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं की संख्या में खासा इजाफा हो जाता है। शारदीय नवरात्र की सप्तमी से दशहरा तक के चार दिवसीय मेले में राज्यभर से श्रद्धालु आते हैं। ज्वालामुखी धाम के 85 वर्षीय पुजारी कल्याण, रामप्रसाद, बद्रीलाल, रामकिशोर, कैलाशचंद एवं रमेशचंद राव एवं ग्रामीण रामानंद मीणा, कल्याण मीणा आदि ने बताया कि प्राचीन ज्वालामुखी मंदिर में चमत्कारिक नारियल के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं के समस्त दुख दूर हो जाते हैं। बताया जाता है कि चमत्कारिक नारियल को अनाज के ढेर के नीचे दबा दिया जाता है। इसके बावजूद नारियल स्वतः ही ऊपर निकल आता है। नारियल की सत्यता जानने के लिए प्राचीन समय में झिलाय दरबार से सैकड़ों गाड़ियों में अनाज भरकर दुर्गाष्टमी के अवसर पर माता के दरबार में पहुंचे और नारियल को अनाज के नीचे दबा दिया। अनाज से पूरा मंदिर भर गया और देखते ही देखते नारियल मंदिर के अंतिम छोर को तोड़कर अनाज से ऊपर निकल आया। इससे प्रभावित होकर झिलाय दरबार ने पवित्र मंदिर का निर्माण करवाया। नवरात्र के मध्य संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में माताजी का अगता रखा जाता है। इसके चलते ग्रामीण खेती-बाड़ी, सिंचाई, गुड़ाई, बोआई सहित सभी कार्य बंद रखते हैं। माता के दरबार में इस वर्ष 53 अखंड जोत जल रही हैं।