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भितरघात पर कार्रवाई के लिए पार्टियों में मंथन
प्रधानउप प्रधान के चुनाव में पार्टी से बगावत करने वालों को पर कार्रवाई के लिए दोनों ही प्रमुख दलों में अंदर ही अंदर राजनीति गर्माई हुई है। टोंक में भाजपा को 25 में से 17 सीटें मिली, लेकिन भाजपा के प्रधान नहीं बन सका एवं प्रधान उप प्रधान के लिए भाजपा के प्रत्याशी को 11-11 मत ही मिले।
अब सवाल उठता है कि आखिर भाजपा के छह मत कहां गए। ऐसी ही स्थिति निवाई में कांग्रेस के सामने भी आई। यहां पर कांग्रेस ने प्रधान तो बना लिया, लेकिन बहुमत होने के बावजूद उप प्रधान नहीं बना सकी। कांग्रेस में आखिरी किसने कॉस वोटिंग की। जिला परिषद में प्रमुख के चुनाव में भाजपा को 17 मत मिले, जबकि भाजपा के जिला परिषद में 25 में से 16 सदस्य जीतकर आए थे। कांग्रेस के 9 जीते थे, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस को एक मत कम मिला। उप प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस को पूरे 9 मत मिल गए। कई अन्य जगह भी ऐसी ही स्थिति सामने आई। इसके लिए पार्टियों में अंदरूनी खींचतान चलने लगी है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामबिलास चौधरी का कहना है कि सभी गतिविधियों से प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराया जाएगा। इसके लिए पार्टी में मंथन किया जाएगा।
भाजपा के मीडिया प्रभारी महेंद्र सिरोठा का कहना है कि ऐसा कुछ हुआ तो नहीं, लेकिन फिर भी पार्टी स्तर पर इसपर विचार किया जा सकता है। वहीं कई राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी टिकट पर जीतने वाले प्रत्याशी का किसी अन्य के खेमे में जाना ठीक नहीं है। नीचे स्तर पर भी दल बदल कानून लागू किए जाने की जरूरत महसूस हो रही है। साथ ही दल बदल प्रत्याशियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करती है।
टोंक. भाजपाप्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी से भेंटकर गुलस्ता देते नवनिर्वाचित जिला प्रमुख सत्यनारायण चौधरी।