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जीवन में गुरु के बिना भक्ति अधुरी रहती है: साध्वी भारती

5 वर्ष पहले
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निवाई | दिव्यज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय श्रीहरि कथा की पूर्णाहुति हुई। पूर्णाहुति के अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी आर्या भारती ने प्रवचन देते हुए कहा कि गुरू का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना। पूर्ण गुरू की पहचान बताते हुए धार्मिक ग्रन्थों में कहा कि गुरू तृतीय नैत्र खोलकर मनुष्य के घट के भीतर ही परमात्मा का दर्शन करा देते है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में गुरु के बिना भक्ति अधूरी है।

संत तोतापुरी जी के द्वारा रामकृष्ण जी ने उस ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त कर माता के असली रूप के दर्शन किए। तब ही उनकी भक्ति भी पूर्ण कहलाई। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्ध भूमि में अर्जुन के हृदय मंदिर के भीतर उस सत्य स्वरूप परमात्मा का दर्शन करवाकर उसे सच्चा और श्रेष्ठ भक्त बना दिया।

इसलिए आज ऐसे ही सदगुरू की खोज प्रत्येक मानव को अवश्य करनी चाहिए। जिनकी शरणागति से ही मनुष्य का कल्याण होता है। इससे पूर्व अतिथि पालिकाध्यक्ष राजकुमारी शर्मा, पार्षद रमेश सोनी, पूर्व पार्षद दिलीप इसरानी ने भगवान श्रीहरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर आरती की। इस दौरान प्रहलाद गौतम, गोपालराम, श्याम, घनश्याम लोदी, मुकेश परिडवाल, जगदीश कुमावत, मुकुट बिहारी गौतम, धन्नालाल, केदारलाल, सुरेश लोदी, विपिन पेन्टर, कैलाश, कमल टेलर, रमेश चिकाना, बिलास बैरवा, धन्नालाल वर्मा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।

निवाई. दिव्यज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीहरि कथा प्रवचन सुनते श्रद्धालु।

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