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अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर

5 वर्ष पहले
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निवाई|स्थानीय सहायककृषि अधिकारी सभागार में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन दुर्गापुरा जयपुर के तत्वावधान में दो दिवसीय समन्वित कीट प्रबन्धन अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को कृषि उपनिदेशक निरंजन सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ कृषि उपनिदेशक निरंजन सिंह राठौड़ ने कहा कि परम्परागत कृषि विकास योजनान्तर्गत किसानों को जैविक खेती की ओर ध्यान देना आवश्यक है। जैविक खाद के उपयोग से मृदा की उर्वरा शक्ति का विकास होता है एवं लोगो के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव नहीं पडता। जैविक उत्पादों का बाजार में अधिक मूल्य भी प्राप्त होता है जिससे किसानों के जीवन स्तर में सुधार होता है। सहायक निदेशक कृषि विस्तार मोहनलाल वर्मा ने कहा कि आज के समय में देश में निर्यात किए जाने वाले फसल उत्पाद आयात करने वाले देशो के द्वारा स्वीकार नहीं किये जाते। कीटनाशकों के फसल उत्पादों में पाए जाने वाले अवशेेष हमारे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव डालते है इस अवसर पर वनस्पति संरक्षण अधिकारी डाॅ. गजेन्द्र बुनकर ने कहा कि किसानों को केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र द्वारा प्रशिक्षण लेकर ख्ुाद आई.पी.एम. उत्पाद बनाए ताकि भारतवर्ष का हर किसान गुणात्मक उत्पादन कर सकें। उन्होनें बताया कि आई.पी.एम. सेवा केन्द्र गाँव में खोलकर किसानों द्वारा आई.पी.एम. इनपूट बना सकते हैं जैसे एन.पी.वी., फैरोमोन ट्रेप, लाईट ट्रेप, ट्राईकोडर्मा बनाकर अपने स्वयं के उपयोग हेतु एवं आसपास के गाँवों में बेच कर आमदनी कमा सकते हैं। इसका प्रशिक्षण केन्द्रीय एकीकृतनाशी जीव प्रबंधन केन्द्र, दुर्गापुरा, जयपुर में किसान निशुल्कः ले सकते हैं। कृषि अधिकारी ज्वाला प्रताप सिंह ने कहा कि फसलों पर कीटनाशकों का न्यायोचित उपयोग करें तथा उनके अंधाधुंध प्रयोग से बचें इस अवसर पर कृषि अधिकारी डाॅ. प्रेम सिंह वर्मा ,सहायक कृषि अधिकारी कजोड मल गुर्जर,सहायक कृृषि अधिकारी जगदीश बैरवा,कन्हैया लाल बैरवा सहित क्षेत्र से प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।

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