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भर्ती रोगी के साथ एक की जगह आते हैं चार से पांच परिजन

6 वर्ष पहले
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नोहर में बच्चों को मास्क बांटे, स्वाइन फ्लू से बचाव की दी जानकारी

स्कूल बच्चों को आयुर्वेद विभाग पिला रहा काढ़ा

जिलेमें स्वाइन फ्लू से हो रही मौतें तथा मिल रहे स्वाइन फ्लू संभावित रोगियों के बाद आयुर्वेद विभाग स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए औषधि युक्त काढ़ा पिला रहा है। जिले में स्थित औषधालयों की टीम स्कूली बच्चों सहित अन्य को काढ़ा पिलाने में जुटी है।

जिला आयुर्वेदिक अधिकारी वैद्य बृजलाल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद अस्पतालों में कार्यरत वैद्यों कर्मचारियों की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं, जो काढ़ा पिलाने का काम कर रही हैं। इसके अलावा संबंधित व्यक्ति को स्वाइन फ्लू से बचाव सावधानियां बता रहे हैं। अब तक जिले में करीब 5404 लोगों को काढ़ा पिलाया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न स्कूलों में 2509 बच्चों को भी काढ़ा पिलाया गया।

प्रगतिरिपोर्ट के लिए बनाया कंट्रोल रूम

इसकीनियमित प्रगति रिपोर्ट के लिए आयुर्वेद विभाग ने जिला कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया है, जिसका प्रभारी वैद्य जितेंद्र शर्मा को बनाया गया है। वैद्य जितेंद्र शर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू के खौफ के बीच आयुर्वेदिक काढ़ा रामबाण बनता जा रहा है। आयुर्वेद रीति से तैयार काढ़ा कई बीमारियों के लिए कारगर औषधि है। गोजिव्यादि क्वाथ पीने से रोग की रोकथाम हो सकती है।

भीड़ के कारण अस्पताल के शौचालय रोजाना करीब 15 सौ लोग प्रयोग करते हैं। हैरत की बात यह है कि जिला अस्पताल में पार्किंग, साफ-सफाई अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, लेकिन वार्डों में मरीजों के साथ अटेंडरों की भीड़ को कम करने का ध्यान किसी जिम्मेदार का नहीं है। जेएसवाई वार्ड में अक्सर पलंग की संख्या के अलावा जमीन पर भी गद्दा बिछाकर मरीज भर्ती कर दिए जाते हैं। ऐसे में मरीजों के साथ अस्पताल में पहुंचने वाले 4-5 लोग अस्पताल की व्यवस्थाओं में बाधक बन रहे हैं। इससे शौचालयों में गंदगी पसरी रहती है।

पुलिसकर्मी या सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी तैनात करने का प्रस्ताव भिजवाया है

^अस्पतालके वार्डाें में लोगों को जाने से मना करने पर लोग चौकीदारों से झगड़े पर उतारु हो जाते हैं। ऐसे में सरकार से अस्पताल में रोगी परिजनों की आवाजाही का समय निर्धारित करने तथा वार्डाें में पुलिसकर्मी या सेवानिवृत सैन्य कर्मी तैनात करने का प्रस्ताव भिजवाया जाएगा। इससे व्यवस्था में सुधार संभव है। डॉ.एचपीरोहिल्ला, पीएमओ, जिला अस्पताल

समय निर्धारित होना चाहिए

^रोगीपरिजनों से मिलने का समय निर्धारित होना चाहिए। इससे व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है। पवनखुराना, सामाजिक कार्यकर्ता

हनुमानगढ़. टाउन के सरकारी अस्पताल में मरीजों के साथ परिजन।

नगर संवाददाता| हनुमानगढ़

एकतरह जहां जिले में स्वाइन फ्लू पैर पसार रहा है वहीं जिला अस्पताल के सामान्य वार्ड से लेकर इमरजेंसी वार्डों में मरीजों से मिलने आने वाले परिजनों की भीड़ परेशानी का कारण बन रही है। हैरानी की बात है कि जिला अस्पताल में रोगी के परिजन कभी भी और कितनी भी संख्या में आ-जा सकते हैं और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ऐसे में तीन साल पहले शुरू हुई परिचायक कार्ड की व्यवस्था भी महज औपचारिकता बन कर रह गई है।

डेढ़ सौ बैड के जिला अस्पताल में रोगियों के साथ परिजनों की भीड़ की वजह से सफाई व्यवस्था तो प्रभावित हो ही रही है वहीं संक्रमण फैलने की अाशंका रहती है। अस्पताल प्रशासन की ओर से रोगी भर्ती टिकट के साथ एक परिचायक कार्ड भी दिया जाता है पर इस नियम पर कोई नहीं चलता। इसके अलावा अस्पताल में तैनात छह चौकीदार सुबह-शाम ओपीडी समय में डॉक्टर्स चैंबर के बाहर व्यवस्था बनाए रखने में रहते हैं फिर भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आती। इमरजेंसी वार्डों में भर्ती मरीजों के उपचार के दौरान मरीजों के पलंग पर 4-4 अटेंडर की मौजूदगी को लेकर कोई भी आपत्ति नहीं उठाता। इसका खमियाजा सीधे-साधे ऐसे मरीज परिजन को भुगतना पड़ रहा है जो सिर्फ अस्पताल में एक अटेंडर लेकर आते हैं।

गार्डलगे तो हो समाधान

एकमरीज के पास चार अटेंडर होने के कारण वार्डों में अनावश्यक भीड़ जमा रहती हैं। चिकित्साधिकारियों के मुताबिक अस्पताल वार्डों में मरीजों के उपचार के दौरान ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्सों चौकीदारों को निर्देशित किया जाता है कि वह अपने वार्ड में एक मरीज के साथ सिर्फ एक अटेंडर को ही रहने दे लेकिन कई लोग झगड़े पर उतारु हो जाते हैं। उनका मानना है कि अस्पताल के वार्डाें में एंट्री समय का सरकार की ओर से रोगियों के परिजनों के मिलने का समय निर्धारित करने पुलिसकर्मी या सेवानिवृत्त सैन्य कर्मचारी तैनात करने से समस्या का हल संभव है।

अस्पतालमें प्रवेश के लिए गेट पास का नियम सख्ती से लागू हो

^रोगीके साथ परिजनों की भीड़ के कारण अव्यवस्था के अलावा संक्रमण का भी खतरा रहता है। स्वाइन फ्लू जैसे कई रोगों का खतरा रहता है। अस्पताल में प्रवेश के लिए गेट पास का नियम सख्ती से शुरू कर दिया जाए तो सफाई व्यवस्था में सुधार संभव है। वहीं असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर नकेल कसी जा सकती है। डॉ.दीपक सैनी, सर्जन, जिला अस्पताल