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वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए खेती के सुझाव
ग्रामोत्थानविद्यापीठ के कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक ग्रामोत्थान विद्यापीठ संस्था के कोषाध्यक्ष सुखराज सिंह सलवारा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में मुख्य अतिथि क्षेत्रीय परियोजना निदेशक डॉ. पीपी रोहिल्ला ने बताया की मृदा स्वास्थ्य को सुधारने के लिए अधिक से अधिक किसानों को मृदा जांच के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा किसान की उपज का मूल्य बढ़ाने के लिये मूल्य संवर्धन की तकनीक अपनाकर अधिक से अधिक किसानों को लाभांवित किया जाए।
राजस्थान पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, बीकानेर के प्रसार निदेशक डॉ. त्रिभुवन शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी रेडियो वार्ता धीणे री बातां को किसानों में लोकप्रिय बनाने पर जोर दिया जाए। देशी नस्ल की गायों को संरक्षित करने पर जोर दिया। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर के निदेशक डॉ. बीएस यादव ने कपास में पेराविल्ट, ग्वार में बैक्टिरियल ब्लाईट एवं सरसों में तना गलन आदि रोगों पर विस्तृत अनुसंधान की आवश्यकता बताई तथा साथ ही किन्नू के बागों में ड्रिप द्वारा घुलनशील उर्वरक देने की बात कही। आत्मा परियोजना निदेशक डॉ. दानाराम कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनूप कुमार ने विभिन्न जानकारी दी। नाबार्ड के जिला महाप्रबंधक संजय मानदाता ने जैविक खेती, सब्जी उत्पादन के बारे में लीड बैंक मैनेजर अजय शर्मा ने किसानों को प्रशिक्षण वित्तीय सहायता से जोड़ने, सरस डेयरी के डॉ. अरूण गुप्ता ने डेयरी संचालकों को प्रायोगिक प्रशिक्षण के लिए हनुमानगढ़ डेयरी का भ्रमण करवाने के बारे में बताया।
कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान नत्थू सिंवर, मदन कूकना, रमेश कुमार, विजयसिंह टाक, बंशीलाल, सुखपाल सिंह, रघुवीर गोदारा, मनजीत कौर, सुमन ने भाग लिया। केंद्र के विषय विशेषज्ञ उमेश कुमार, महावीरप्रसाद कस्वां, संतोष, डॉ. कुलदीप, डॉ. मुकेश कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र नोहर के वैज्ञानिकों अक्षय घिंटाला तथा डॉ. नवीन सैनी ने प्रगति प्रतिवेदन तथा आगामी कार्य योजना प्रस्तुत की। डॉ. दाताराम ने नोहर सुझाव दिया कि यहां की जलवायुवीय परिस्थितियों के आधार पर शुष्क खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को जागरूक किया जाए तथा इसे जैविक खेती से जोड़ा जाए।