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चौटाला पिता-पुत्र की सरकार क्या गिरी, तब से मन में घिर गया अंधविश्वास
ऐलनाबाद में जाना और रहना अशुभ मानते हैं सीएम
ऐलनाबादविधानसभा इनेलो का गढ़ है। इस सीट पर हमेशा इनेलो का कब्जा रहा है। इस शहर से दो घटनाएं बड़ी चर्चित हैं। लोगों की जुबान पर अकसर इसके चर्चे सुनने को मिलते हैं कि हर सीएम शहर में आने से पहले सोचते हैं। हालांकि विरोधी ही इसके उदाहरण दे रहे हैं और इनेलो के कार्यकर्ता इसे विरोधियों का प्रचार कहते हैं।
1999 से 2004 तक ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान वह ऐलनाबाद शहर में नहीं आए। आसपास के गांवों में जरूर गए। ऐलनाबाद से गुजरकर मिठी सुरेरा, मिठनपुरा, खारी सुरेरां, किशनपुरा, काशी का बास, केहरवाला गांवों मेंं जाने के लिए दो नए बाइपास निकाले गए। एक तो हनुमानगढ़ बाइपास और दूसरा नोहर बाइपास। ताकि इन गांवों में जाने के लिए शहर में आना पड़े। 2004 के लोकसभा चुनावों में शहर के वर्करों की मीटिंग सुरेरा चौक पर रखी गई।
तत्कालीन कानफेड के चेयरमैन और कांग्रेसी नेता मलकीत सिंह खोसा ने बताया कि 1977 में देवीलाल सीएम थे। 1979 में भजनलाल जनता पार्टी के एमएलए तोड़कर अपने साथ राजस्थान ले गए। राजस्थान के गृह मंत्री लालचंद डूडी ने जयपुर में रूकने का प्रबंध किया था। इस घटनाक्रम के समय देवीलाल ऐलनाबाद में थे। देवीलाल की सरकार गिर गई। दूसरा घटनाक्रम 1990 का है। तब ओमप्रकाश चौटाला प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उस समय उनके छोटे भाई रणजीत सिंह, हिसार से वीरेंद्र सिंह, कृपाराम पूनियां, रघुवीर कादियान जैसे कुछ अन्य नेताओं ने सरकार के खिलाफ बगावत कर दी थी। उस समय ओमप्रकाश चौटाला ऐलनाबाद में ही थे, या कुछ ही दिनों पहले शहर से होकर गए थे।