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अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन
शिक्षकदिवस पर दो मंत्रियों शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा शिक्षकों को लेकर की गई टिप्पणी राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ विभिन्न शिक्षक संगठनों ने रविवार को जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मंत्रियों का पुतला फूंककर रोष जताया। रविवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे जिले भर से आए शिक्षक अधिकारी जंक्शन में एन पीएस स्कूल के सामने राजस्थान शिक्षक शिक्षा अधिकारी संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्र हुए। एन पीएस स्कूल के सामने हुई सभा को संबोधित करते हुए हनुमानप्रसाद शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा का निजीकरण करने के लिए एकीकरण की प्रक्रिया शुरू की। इस जनविरोधी नीति के विरोध में शिक्षक और ग्रामीण खड़े हुए तो सोची-समझी नीति के तहत मंत्रियों ने शिक्षकों पर अपमानजनक टिप्पणी की ताकि सभी का ध्यान इस एकीकरण के विरोध से हट जाए। बृजलाल छिंपा ने कहा कि एकीकरण समानीकरण की आड़ में शिक्षकों के पद समाप्त करने की साजिश रची जा रही है। आरटीई का सरासर उल्लंघन कर बच्चों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। शिक्षक नेता रामलुभाया तिन्ना ने कहा कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर अध्यापकों का सम्मान होना चाहिए लेकिन पंचायतीराज मंत्री गुलाबचंद कटारिया, शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ और शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम एस. अग्रवाल ने शिक्षकों के संबंध में अपमानजनक भाषा का उपयोग किया। सभा को दीपक बारोटिया, त्रिलोकीनाथ महाेर, विजयसिंह राजपूत, महावीर भाकर, प्रेम चोपड़ा, मनोहर बंसल, मंजू सिहाग, अाशा शर्मा, राजेंद्र सक्सेना आदि ने संबोधित किया।
कलेक्ट्रेटके सामने फूंका पुतला: एनपीएस स्कूल के सामने सभा कर सभी शिक्षक एक जुलूस के रूप में दोनों मंत्रियों शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अर्थी लेकर जिला कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिक्षकों ने पुतले फूंके और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे पहले एन पीएस स्कूल के सामने भी शिक्षकों ने मातम किया और शिक्षा मंत्री को जमकर कोसा। जिला कलेक्ट्रेट पर पुतले फूंकने के बाद सभी संगठनों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
यहहै शिक्षकों की मांगें
^एकीकरणके माध्यम से बंद किए गए स्कूलों का संचालन पुन: शुरू करवाया जाए।
^समानीकरण की प्रस्तावित प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
^स्कूलों में रिक्त प