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स्कूल का भवन जर्जर, 375 छात्राएं और कक्षा कक्ष चार
कस्बेका एक मात्र राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल आवश्यक संसाधनों अध्यापकों की कमी के चलते अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है।
स्कूल की बदहाल व्यवस्था से बालिकाओं का भविष्य अंधकारमय है। सरकार भले ही बेहतर शिक्षण व्यवस्था बनाने के लिए स्कूलों को मर्ज कर वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी हालत कुछ और ही बयां कर रहे हैं। कस्बे के सरकारी बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल में राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल को मर्ज किए जाने के बाद इस विद्यालय की समस्या ओर बढ़ गई है। विद्यालय में भवन अध्यापकों की कमी से स्कूल का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार स्कूल में प्रधानाचार्या का पद लंबे अरसे से रिक्त पड़ा है। व्याख्याताओं के पांच पद स्वीकृत है, इनमें से दो व्याख्याताओं के पद रिक्त पड़े हैं। इन पर भी प्रधानाचार्य का अतिरिक्त कार्यभार है। द्वितीय श्रेणी अध्यापकों के तीन पद रिक्त है। ऐसे में स्कूल में अध्ययनरत 375 छात्राओं की शिक्षण व्यवस्था पूर्णतया गड़बड़ा गई है।
कक्षाकक्षों में क्षमता से अधिक छात्राएं
स्कूलमें पर्याप्त कक्षा कक्ष नहीं होने के कारण छात्राओं को उपलब्ध कमरों में सभी नियम कायदों को ताक पर रखकर बैठाया जा रहा है। मात्र चार कक्षा कक्ष होने के कारण प्रत्येक कक्ष में 90-95 छात्राओं को बैठा कर पढ़ाया जा रहा है। अपर्याप्त संसाधनों से पहले ही जूझ रहे इस विद्यालय पर एक उच्च प्राथमिक विद्यालय का भार और डाल दिया गया है। हालांकि विद्यालय परिसर में दो नए कक्षा कक्षों का निर्माण जारी है, पर इनमें कक्षाएं नए शैक्षणिक सत्र से लग पाने की संभावना है।
^स्कूल का पूरा भवन जर्जर अवस्था में है। स्कूल को खाली पड़े सरकारी बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरित करने के लिए अधिकारियों को लिखा गया है। लेकिन अभी तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
आरतीअग्रवाल, कार्यवाहकप्रधानाचार्या, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय जैतसर
^राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल को राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल के खाली पड़े भवन में स्थानांतरित करने के लिए मुझे जानकारी मिली है, इस पर विचार किया जा रहा है।
मनोहरलालचावला, जिलाशिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) श्रीगंगानगर।
जैतसर. राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल का मुख्य द्वार।