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पुलिस की लापरवाही से मिली जमानत तो धमका रहे आरोपी
नाबालिगलड़की से दुष्कर्म मामले में चालान पेश करने में पुलिस की देरी की लापरवाही का खामियाजा अब पीड़िता के परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। पीड़िता के पिता का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही से आरोपी को जमानत मिल गई और अब वह उन्हें राजीनामा करने के लिए धमका रहा है। हैरानी वाली बात यह है कि 11 दिन बीत जाने के बाद भी एसपी ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है। परेशान होकर पीड़िता के पिता ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, पुलिस महानिरीक्षक कलेक्टर को ज्ञापन भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
ज्ञापन में लिखा है कि नोहर पुलिस थाना प्रभारी भंवरलाल डीएसपी ने मिलीभगत करके आरोपी के खिलाफ कोर्ट में 90 दिन के अंदर चालान पेश नहीं किया। जिससे आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल गई। हनुमानगढ़ एसपी शरत कविराज का कहना है कि 90 दिन में आरोपी के खिलाफ अदालत में चालान पेश नहीं करने के मामले में नोहर सीआई के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। अगर पीड़ित पक्ष को कोई राजीनामा के लिए धमका रहा है तो इस मामले की भी जांच करवाई जाएगी।
पीड़िता के पिता ने 30 जुलाई 2014 को नोहर पुलिस थाना में मामला दर्ज करवाया था कि 25 जुलाई को दीपलाना के फारूक पुत्र गफ्फूर ने उसकी नाबालिग लड़की को बहला-फुसला कर अपने साथ भगा ले गया। बाद में उसे नशीली दवा खिलाकर उससे बीकानेर के एक होटल में दुष्कर्म किया। इस आरोप में पुलिस ने 14 अगस्त को आरोपी फारूक को गिरफ्तार किया था और 14 नवंबर को आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया, जबकि नियमानुसार गिरफ्तार के 90 दिन से पहले चालान पेश करना था। कोर्ट ने इसी का लाभ देते हुए आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया।
पुलिस सूत्रों की मानें तो नोहर डीएसपी ने दस दिन पहले ही आरोपी के खिलाफ चालान पेश करने के लिए फाइल नोहर पुलिस थाना में भिजवा दी थी लेकिन थाना में फाइल पड़ी रही। इस फाइल पर सीआई ने ध्यान नहीं दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के साथ मिलीभगत करके जानबूझ कर 90 दिन के अंदर कोर्ट में चालान नहीं पेश किया।