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सियाचिन के बहादुर हनुमनथप्पा नहीं रहे

5 वर्ष पहले
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नई दिल्ली | सियाचिनमें छह दिन तक बर्फ दबे रहने और फिर 50 घंटे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद लांस नायक हनुमनथप्पा ने दम तोड़ दिया। गुरुवार को दिन में पौने बारह बजे उनकी जिंदगी हार गई। बर्फ में 35 फीट नीचे दबे रहने के बावजूद उनकी जीवटता ने दुनिया को अचरज में डाल दिया था। उनके जल्द ठीक होने की कामना में देशभर में दुआएं की जा रही थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, बर्फ ने उनके गुर्दों और लिवर को काफी नुकसान पहुंचाया था। कई अंग काम नहीं कर रहे थे। इससे वे डीप कोमा में चले गए थे। इन हालात में उनके बचने की उम्मीदें धूमिल थीं।







Quote Box :

‘वह हमें उदास और व्यथित छोड़ गए हैं। लांस नायक हनुमनथप्पा की आत्मा को शांति मिले। आपके अंदर जो सैनिक था, वह अमर है। हमें गर्व है कि आप जैसे शहीदों ने भारत की सेवा की।’ - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री --------- “”सियाचिन की दुर्गम सीमा पर कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाने वाले हमारे बहादुर सैनिकों के साथियों और परिजनों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। - मनोहर पर्रीकर, रक्षा मंत्री --------- ‘अपने जीवन काल में भारत के इस वीर सपूत ने पूरे देश की जनता को एकजुट कर दिया। पूरे देश ने उनकी सलामती के लिए दुआएं मांगी। आज हर नागरिक उनके लिए दुखी है।’ - सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष ----------- “”मैं हनुमनथप्पा के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। उनके परिजनों के जल्द ही इस दुख से उबरने की कामना करता हूं।’’ - सिद्धारमैया, मुख्यमंत्री, कर्नाटक ---------- ‘हनुमनथप्पा की मृत्यु के समाचार से दुखी हूं। बहादुर सैनिक ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें और हादसे में मारे गए उनके साथियों को सलाम।’ - ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल

Story Box :

सेना में 13 साल पहले भर्ती हुए थे हनुमनथप्पा : मद्रास रेजिमेंट की 19वीं बटालियन के हनुमनथप्पा 13 साल पहले सेना में भर्ती हुए थे। कर्नाटक में धारवाड़ जिले के बेतादुर गांव के हनुमनथप्पा (33) के परिवार में प|ी महादेवी और दो साल की बेटी नेत्रा कोपड़ हैं। ----------- हादसा 20 हजार फीट की ऊंचाई पर हुआ था : सियाचिन ग्लेशियर में 19,600 फीट की ऊंचाई पर तीन फरवरी को हिमस्खलन हुआ था। इससे भारतीय सेना के 10 सैनिक बर्फ के नीचे दब गए थे। इनमें से हनुमनथप्पा छह दिन बाद चमत्कारिक रूप से जिंदा निकाल लिए गए थे। बाकी नौ सैनिकों की मौत हो गई थी। हनुमनथप्पा को दिल्ली में सेना के अस्पताल में नौ फरवरी को भर्ती किया गया था। --------- शोक में डूबा बेतादुर गांव : हनुमनथप्पा की मौत की खबर मिलते ही उनका गांव शोक में डूब गया। बेतादुर गांव में उनके घर के पास बड़ी संख्या में परिजन, दोस्त और अन्य लोग पहुंचे। कई लोग खबर सुनकर रो पड़े। उन्होंने बताया कि किस तरह हनुमनथप्पा अपने पिता के निधन के बाद मेहनत कर आगे बढ़े। गरीबी से बाहर निकले। पिता की मौत हुई, तब हनुमनथप्पा सिर्फ एक साल के थे। ---------- पाकिस्तान ने कहा- सियाचिन से सेना हटाएं : नई दिल्ली|लांस नायक हनुमनथप्पा की मौत के दिन ही पाकिस्तान ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच सियाचिन मसले का “”तत्काल’’ हल तलाशने का वक्त गया है। वहां से आपसी सहमति से सेनाएं हटाकर अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है। पिछले साल प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सियाचिन से सेनाएं हटाने का मसला उठाया था। इसका जिक्र करते हुए पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने गुरुवार को कहा, “”ये हादसे सिर्फ यही बताते हैं कि मसले को हल करने की जरूरत है। तत्काल और बातचीत के जरिए शांति पूर्ण तरीके से।’’

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