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धूणीनाथ आश्रम तोड़ने के विरोध में प्रदर्शन

7 वर्ष पहले
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नोखामें धूणीनाथ आश्रम को कब्जा बताकर तोड़ने और किसानों की पानी-बिजली की समस्याओं का समाधान नहीं करने का आरोप लगाते हुए दलित समाज के लोगों ने पूर्व संसदीय सचिव और पूर्व गृह राज्य मंत्री के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर एक दिवसीय धरना देकर प्रदर्शन किया।

बुधवार को पूर्व संसदीय सचिव गोविन्द मेघवाल और पूर्व गृह राज्य मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल के नेतृत्व में दलित समाज के लोग कलेक्ट्रेट के सामने कर्मचारी मैदान में इकट्‌ठा हुए। दलित समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और धूणीनाथ आश्रम तोड़ने पानी-बिजली की समस्याओं के विरोध में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। बाद में एक प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर आरती डोगरा से मिला और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। इससे पूर्व धरनास्थल पर पूर्व संसदीय सचिव मेघवाल ने भाजपा सरकार को जमकर कोसा।

उन्होंने कहा कि नोखा में 85 साल पुराने धूणीनाथ आश्रम को तोड़कर भाजपा सरकार ने जता दिया है कि वह दलित विरोधी है। वसुंधरा सरकार ने पिछले नौ माह के कार्यकाल में दलितों-पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, किसानों व्यापारियों के लिए कुछ भी नहीं किया है। इसके विपरीत गहलोत सरकार ने जो कल्याणकारी योजनाएं शुरू की थी, उन्हें समीक्षा के नाम पर बंद कर रही है। उप चुनावों में में चार में से तीन सीटें कांग्रेस को जीतकर जनता ने बता दया है कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मेघवाल ने किसानों के लिए तीन में से एक समूह में ही पानी चलाने, कृषि कनेक्शन बंद करने, ट्यूबवेल पर सिंगल फेस बिजली बंद करने डिग्गी अनुदान तीन लाख से घटाकर डेढ़ लाख करने के मुद्दों पर भी सरकार की आलोचना की। पूर्व मंत्री बेनीवाल ने कहा कि कांग्रेस हमेशा दलित और किसानों के साथ रही है। इनके अधिकारों के लिए पार्टी हमेशा संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त को साजिशपूर्ण तरीके से धूणीनाथ आश्रम को तोड़कर प्रशासन ने दलितों का अपमान किया है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बेनीवाल ने भाजपा सरकार को किसान विरोधी बताया। पूर्व सांसद भरतराम मेघवाल, जिला प्रमुख मेघाराम महिया, केशराराम गोदारा, हाकम खां, सुभान खां, पूर्व सांसद शंकर पन्नु, ब्रह्मदत्त चोटिया, चंपालाल देशप्रेमी, मोहनभाई नायक आदि ने भी अपने विचार रखे। प्रवक्ता रविदास मेघवाल ने बताया कि दलित समाज और किसानों की मांग