बेर बने जीवन यापन का सहारा
कृषिविभाग द्वारा भ्रमण पर ले जाने की योजना एक किसान के लिए वरदान साबित हुई। इससे केवल किसान ने एक अनूठी फसल की पैदावार शुरू की बल्कि अपने जीवन यापन का भी सहारा बनाया। कस्बे के पास रहने वाले एक बढ़ईगीरी से कृषि का कार्य करने वाले बजरंग लाल जांगिड़ जिसने भाई बंटवारे के बाद कृषि विभाग द्वारा आयोजित भ्रमण के लिए कृषि पर्यवेक्षक हनुमान लक्षकार द्वारा नए तरीके से खेती करने की जानकारी के लिए सन् 2008 में प्रेरित कर भ्रमण पर लेकर जोधपुर गए। वहां कृषि विशेषज्ञों द्वारा बागवानी के बारे मे दी गई। जानकारी को अपनाकर 36 पौधे गोला-सेव किस्म के बेर के पौधे खेत में लगाए। जीवन यापन के लिए मिले इस एक मात्र सहारे को अपनाकर अन्य फसलें भी उगाई।
दोमाह में एक लाख कमाए
बजरंगलालने बताया कि बेर के पौधों के साथ ही अन्य व्यापारिक फसलें जैसे रजका, मैथी, पालक, बैंगन, मिर्ची, मूली आदि को उगाने से दोहरी आमदनी होने से परिवार के भरण-पोषण में केवल आसानी हुई। बल्कि बेर के फलों को बेच कर जनवरी फरवरी के दो माह में लगभग एक लाख की अतिरिक्त आय होने से जीवन यापन करने के साथ ही कुछ बचत भी करने लगा। उसने बताया कि इससे प्रेरित होकर इस समय उसके खेत में करीब 100 पौधे बेर के साथ ही 30-40 पौधे अनार के भी लगाए है। इससे अच्छी कमाई हो रही है, जो अब जीवन यापन का सहारा है।
पचेवर. बेरके पौधों के साथ अन्य फसलों को दिखाता किसान।