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संतों के हृदय में वास करते हैं भगवान:गोवर्धनराम
भगवानमंदिरमें भी वास करते हैं और संतों के हृदय में भी। जिस प्रकार जल का कोई आकार नहीं होता है, उसे जिस भी बर्तन में डाला जाता है वह उसी आकार का हो जाता है। यह उद्गार पदमपुर रोड स्थित बिश्नोई मंदिर प्रांगण में गुरुवार से शुरू हुई जाम्भाणी हरिकथा के दौरान संत डॉ. गोवर्धनराम ने व्यक्त किए। कथा दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक हुई।
बिश्नोई मंदिर में कथा सुनते श्रद्धालु कथा करते संत डॉ. गोवर्धन राम।