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एक स्कूल दान में लेता है रद्दी कबाड़, बच्चों को पढ़ाता है निशुल्क

6 वर्ष पहले
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किसीने कभी नहीं सोचा होगा कि आपके घर में पड़ा कबाड़ और रद्दी भी किसी का भविष्य सवार सकती हैं, लेकिन शहर की दो संस्थाओं ने मिलकर इसे मुमकिन कर दिखाया है। सिर्फ ये गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि साथ में खान-पीने की चीजें भी बांटते हैं। दरअसल, शहर में एक इवनिंग स्कूल ऐसा भी है, जहां दान में आई हुई रद्दी कबाड़ से होने वाली आय से बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया जा रहा है। घर में बेकार पड़ी रद्दी को बाहर कर मोदी के स्वच्छता अभियान में शामिल होकर देश को स्वच्छ रखने में अपना योगदान तो दे ही रहे हैं साथ ही गरीब बच्चों को शिक्षित कर देश के विकास की नींव भी मजबूत कर रहे हैं।

अध्यापकोंके वेतन के लिए ली जाती है रद्दी

मुख्यसेवादार तेजेंद्र पाल सिंह टिम्मा ने बताया कि स्कूल में 4 अध्यापकों को रखा है और इसके वेतन के लिए संस्था के पदाधिकारियों ने नई पहल की योजना बनाई। उन्हें वेतन देने के लिए संस्था से जुड़े सदस्यों के घर से प्रत्येक माह की रद्दी इकट्ठा की जाती है। इसे बेचकर जो रुपए आते हैं उससे अध्यापकों का वेतन दिया जाता है। अगर रुपए पूरे नहीं पड़ते तो संस्था के पदाधिकारी राशि मिलाकर अध्यापकों को वेतन देते हैं।

बच्चोंको दी जाती हैं किताबें

यहांपढ़ने आने वाले सभी बच्चों को किताबें भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा खाने-पीने की भी व्यवस्था की जाती है। बच्चों को खाने में कभी फल, बिस्कुट अन्य ताकतवर चीजें और पीने में जूस दिया जाता है। बच्चों की डाइट के हिसाब से ही खाने-पीने की चीजें दी जाती हैं।

मेम्बरबनाकर इसे बढ़ाने की है योजना

लायंसक्लब विकास की अध्यक्ष ने बताया कि इस योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है। जितने भी मेम्बर बनेंगे उन सभी के घरों से प्रत्येक माह की रद्दी इकट्ठा की जाएगी। कलेक्शन करने वाला व्यक्ति रद्दी की रसीद देगा, जिसमें उसका वजन अंकित रहेगा।

इनका कहना है

^कक्षा6 से 8 तक विज्ञान, गणित अंग्रेजी की कक्षाएं भी शुरू करने की प्लानिंग चल रही है। इसके लिए अध्यापकों के आवेदन भी मांगे गए हैं। अनुआहुजा, अध्यक्ष, लायंस क्लब विकास

^बच्चोंकी संख्या बढ़ने पर स्कूल के लिए नई जगह भी तलाश की जा रही है। ताकि दोनों संस्थाओं लोगों के योगदान से गरीब परिवार के बच्चों को साक्षर किया जा सके। तेजेंद्रपाल सिंह टिम्मा, मुख्य सेवादार